यूपी में आंधी-तूफान और बारिश का कहर: प्रदेश में 45 लोगों की जान गई, अगले 36 घंटे तक मौसम रहेगा खराब
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और तूफान के कारण पिछले 48 घंटों में 45 लोगों की मौत हो गई है ...और पढ़ें

HighLights
पिछले 48 घंटे में भारी बारिश-तूफान से 15 लोगों की मौत।
प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।
राहत-बचाव कार्य तेज, अगले 36 घंटे मौसम खराब रहने की संभावना।
जागरण टीम, लखनऊ। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण गुरुवार शाम से लगातार हो रही बारिश और तेज हवा ने उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 24 घंटे में प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई है। राहत व बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
शनिवार को अवध से लेकर पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कच्चे मकान, दीवार व पेड़ गिरने से हुए हादसों में 45 लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न जिलों में पिछले 48 घंटों के दौरान 15 लोगों की मौत हुई है। कई जिलों में सड़कें जलमग्न हो गईं, बिजली आपूर्ति ठप रही और रेल तथा हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ। सबसे अधिक 28 मौतें अवध क्षेत्र में हुई हैं।
एहतियातन प्रशासन से प्रभावित जिलों में स्कूल-कालेज बंद कर दिए हैं। बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में पककर तैयार अगेती धान की फसल पर भी पड़ा है। खेतों में फसल गिर से धान की कटाई में देरी के साथ ही दाने की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सबसे ज्यादा बहराइच में पांच लोगों की मौत
अवध में बारिश के कारण हुए हादसों में सबसे ज्यादा बहराइच में पांच लोगों की मौत हुई है, जबकि अयोध्या, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में चार-चार, बाराबंकी तीन तथा लखनऊ में एक व्यक्ति की मौत हुई। हरदोई और श्रावस्ती में एक-एक तथा बलरामपुर में दो लोगों की जान गई। गोंडा में बिजली का तार निकालते समय आम का पेड़ गिरने से दो दोस्तों की दबकर मौत हो गई।
अमेठी में कच्ची दीवार गिरने से महिला की जान गई। बहराइच में दीवार गिरने से सिपाही समेत चार लोगों की मौत हुई और पांच घायल हुए। श्रावस्ती में पेड़ और कच्चा मकान गिरने से एक की मौत तथा सात लोग घायल हुए। गोरखपुर-बस्ती मंडल में बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए।
पेड़ गिरने से दबकर पांच लोगों की मौत
गोरखपुर शहर में शाम साढ़े चार से साढ़े छह बजे के बीच दो घंटे में 150 मिलीमीटर बारिश हुई। शहर में बाढ़ जैसे हालात बन गए। गोरखपुर में विभिन्न स्थानों पर पेड़ गिरने से दबकर पांच लोगों की मौत हुई और 14 घायल हुए। संतकबीरनगर में भी पेड़ के नीचे दबकर युवक की जान चली गई।
मंडल के सात जिलों में 400 से अधिक बिजली पोल और हजारों पेड़ गिरने से बिजली संकट पैदा हो गया। गोरखपुर-लखनऊ-वाराणसी रेल मार्ग पर पेड़ गिरने से संचालन प्रभावित रहा। वहीं, मीरजापुर में मकान की छत गिरने से पांच लोग घायल हुए। आजमगढ़ में कच्चे मकान की दीवार ढहने से 70 वर्षीय वृद्धा की मलबे में दबकर मौत हो गई। मऊ में कच्ची दीवार गिरने से दंपती समेत तीन लोग घायल हुए। जौनपुर में छप्पर पर पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।
50 से अधिक घर और दीवारें गिरीं, मलबे में दबे लोग
प्रयागराज में मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में पेड़ की डाल गिरने से हेड कांस्टेबल इंद्रमणि तिवारी की जान चली गई। कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, महोबा, फतेहपुर और औरैया में 50 से अधिक घर और दीवारें गिरीं। मलबे में दबकर महिला और बालक समेत छह लोगों की मौत हुई और डेढ़ दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। जालौन में सड़कों पर कीचड़ और जलभराव से वाहन फंसे रहे। इटावा-मैनपुरी मार्ग के अंडरपास में दो कारें करीब पांच फीट पानी में फंस गईं।
उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रामपुर में लाइन ठीक करते समय संविदा विद्युतकर्मी मंसूर उर्फ वाली की करंट लगने से मौत हुई। मुरादाबाद में बिजली के खंभे में करंट उतरने से अशोक की जान चली गई। संभल में कच्चा लिंटर गिरने से चार बच्चे घायल हुए और दो अन्य मकान भी गिर गए। शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत के 15 बिजली उपकेंद्रों में पानी भरने से करीब 15 घंटे तक आपूर्ति प्रभावित रही। बरेली के आठ उपकेंद्र भी ठप हुए और बरेली-दिल्ली उड़ान रद करनी पड़ी।
फिर खतरे के निशान से ऊपर मंदाकिनी
भारी वर्षा के कारण विभिन्न नदियों के जलस्तर में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। चित्रकूट में 29 अगस्त की रिकार्ड बाढ़ के बाद एक बार फिर मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। शुक्रवार रात 12 बजे रामघाट में नदी का जलस्तर समुद्र तल से 127.200 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 126.500 मीटर से 70 सेंटीमीटर ऊपर रहा। शनिवार सुबह आठ बजे जलस्तर थोड़ा घटा पर रामघाट का आरती स्थल व सीढ़ियां डूबी हैं, दुकानों में पानी घुसा है।
रामघाट व आरोग्यधाम में बैरिकेड कर आवागमन रोका गया है। बरदहा नदी उफान पर होने से मानिकपुर-सतना मार्ग पर टिकरिया का रपटा बहने से उप्र-मप्र का संपर्क कट गया है। यहां बैरिकेड कर आवागमन रोका है। बांधों के फाटक खोले गए हैं। गंगा-यमुना समेत अन्य नदियों में भी जलस्तर बढ़ रहा। पीलीभीत में शारदा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
अगले 36 घंटे तक खराब रहेगा मौसम
राहत आयुक्त डाॅ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि वर्षा से सर्वाधिक प्रभावित 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में 130 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई।
वर्षा व आंधी से चार पशुओं की मृत्यु और 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। फायर सर्विस, पीएसी, नागरिक सुरक्षा, होमगार्ड और आपदा मित्रों को आवश्यकता के अनुसार तैनात करने के साथ राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल में भारी बारिश के मद्देनजर पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए बाढ़ राहत दलों को सतर्क कर दिया गया है। जिलाधिकारियों को स्वयं क्षेत्र में रहकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। आपदा की स्थिति में राहत हेल्पलाइन 1070 पर सूचना देने को कहा गया है।
