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यूपी के गांवों और कस्बों में रात को 3 से 4 घंटे बिजली कटौती, कोयले की कमी से पावर प्लांटों में घटा उत्पादन

Published: Tue, 15 Sep 2026 01:04 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में फिलहाल रात में घंटों बिजली कटौती जारी रहेगी। वर्षा से गीले कोयले और ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. वर्षा से गीले कोयले के कारण तापीय बिजली उत्पादन घटा।

  2. नेपाल बाढ़ से जल विद्युत उपलब्धता भी प्रभावित हुई।

  3. ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में रात में 3-4 घंटे कटौती।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। ग्रामीणों व कस्बों में रहने वालों को फिलहाल रात में घंटों बिजली कटौती से जूझते रहना पड़ेगा। वर्षा से गीले कोयले व तकनीकी दिक्कतों से जहां तापीय बिजली का उत्पादन घटा है वहीं नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से हाइड्रो पावर(जल विद्युत) की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है।

इससे दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश को भी दो से तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि दिन में तो सोलर पावर के सहारे प्रदेशवासियों को मांग के मुताबिक बिजली मिल जा रही है लेकिन रात में कहीं से बिजली न उपलब्ध होने के कारण खासतौर से गांव से लेकर कस्बों में तीन से चार घंटे बिजली की कटौती हो रही है।

बिजली संकट के मद्देनजर सोमवार को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। डॉ. गोयल ने बताया कि इनदिनों देशव्यापी बिजली संकट है। कोयला खदान क्षेत्रों में भारी वर्षा से कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है जिससे सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा व बारा तापीय बिजली घरों से बिजली का उत्पादन घटा है।

तकनीकी कारणों से अनपरा, हरदुआगंज, जवाहपुर, ओबरा की यूनिटों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। तमाम कोशिशों के बावजूद दो से तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है। अधिकतम मांग लगभग 30 हजार मेगावाट है जबकि उपलब्धता 27 हजार मेगावाट की ही है।

अध्यक्ष ने बताया कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय से पर्याप्त कोयले की आपूर्ति का अनुरोध किया गया है। इस बीच अनपरा से लैंको और बारा को कोयले की आपूर्ति सुधार कर रात में 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन बढ़ाया गया है।

डॉ. गोयल ने बताया कि शीघ्र अन्य बंद यूनिटों से बिजली का उत्पादन शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सप्ताहभर में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

अध्यक्ष ने बताया कि जहां रात में रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है वहां दिन में अतिरिक्त बिजली देकर भरपाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विदित हो कि गांव को 18, बुंदेलखंड को 20, नगर पंचायत-तहसील को 21.30 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। जिला मुख्यालय से लेकर बड़े शहर व उद्योग बिजली कटौती से मुक्त हैं।

पावर एक्सचेंज से भी नहीं मिल पा रही पर्याप्त बिजली

वैसे तो राज्य, बिजली की कमी को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली लेकर पूरा करते रहे हैं लेकिन एक सितम्बर से औसतन 16 घंटे अधिकतम 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। रात में तो और भी स्थिति खराब रहती है।

जानकारों का कहना है कि नेपाल से पहले एक्सचेंज को लगभग डेढ़ हजार मेगावाट हाइड्रो पावर मिल जाया करती थी लेकिन इनदिनों लगभग 700 मेगावाट बिजली भारत से नेपाल को दी जा रही है।

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