बारिश से कोयले की किल्लत, पावर प्लांट पड़े ठप: प्रदेश में 2500 मेगावाट तक का बिजली संकट
लगातार बारिश के कारण कोयले की कमी से उत्तर प्रदेश के कई तापीय विद्युत उत्पादन संयंत्रों में बिजली उत्पादन ठप ...और पढ़ें

HighLights
बारिश के कारण खदानों से कोयला उत्पादन बाधित हुआ।
लगभग आधा दर्जन तापीय विद्युत इकाइयां उत्पादन ठप।
प्रदेश में 2000-2500 मेगावाट बिजली की कमी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। लगातार वर्षा से खदानों से कम कोयला निकलने की वजह से तापीय विद्युत उत्पादन परियोजनाओं में बिजली का उत्पादन बाधित होने लगा है। कोयले की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों के कारण प्रदेश की लगभग आधा दर्जन तापीय उत्पादन इकाइयों से उत्पादन ठप कर दिया गया है।
मौजूदा मांग को पूरा कर पाने में पावर कारपोरेशन प्रबंधन खुद को असमर्थ पा रहा है। मांग के मुकाबले लगभग 2000 से 2500 मेगावाट तक कम बिजली की आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय बिजली कटौती अधिक होने की सूचना है।
प्रदेश में बिजली की मौजूदा मांग लगभग 25 हजार मेगावाट बनी हुई है। बिजली की मांग छह सितंबर को 23,173 मेगावाट, सात सितंबर को 25,238 मेगावाट, आठ सितंबर को 26,032 मेगावाट, नौ सितंबर को 25,806 मेगावाट तथा 10 सितंबर को 25,701 मेगावाट दर्ज की गई।
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बताया जाता है कि इस समय पावर एक्सचेंज पर भी बिजली की उपलब्धता कम हो गई है। जिससे बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए बिजली खरीदने में भी दिक्कतें हैं। अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था चुनौती बन गई है।इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पर पड़ा है।
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वर्षा की वजह से बिजली आपूर्ति में आ रही बाधाएं भी लोगों को परेशान कर रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बंद चल रही उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू कराए जाने की मांग सरकार से की है।
