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UP में बिजली चोरी पर लगाम, हानियों में 30 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

Published: Sat, 15 Aug 2026 09:57 AM (IST)

पावर कारपोरेशन की सख्ती से एक वर्ष में बिजली की चोरी और एटीएंडसी हानियों में 30% की कमी आई है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. बिजली चोरी पर सख्ती से 30% एटीएंडसी हानियां घटीं।

  2. विशेष अभियान में 654.31 करोड़ रुपये राजस्व की वसूली हुई।

  3. अपर मुख्य सचिव ने अधिक हानि वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा प्रदेश में बिजली की चोरी पर कड़ाई से अंकुश लगाए जाने का नतीजा रहा कि एक वर्ष में ही 30 प्रतिशत तक एटीएंडसी हानियां (कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि) कम हो गईं है। प्रबंधन के कलस्टर आधारित विशेष अभियान से जहां केस्को में सर्वाधिक 30.06 प्रतिशत वहीं पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 23.11 प्रतिशत, मध्यांचल में 20.94 प्रतिशत, दक्षिणांचल में 9.54 प्रतिशत तथा पश्चिमांचल की हानियों में 5.58 प्रतिशत की कमी आई है। बरेली के किला फीडर की हानि तो 63 और देवबंद के टाउन-3 फीडर की 53 प्रतिशत तक घटी है।

बड़े पैमाने पर बिजली चोरी से ज्यादा हानियों वाले प्रदेश के फीडरों की शुक्रवार को शक्तिभवन मुख्यालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ऊर्जा के साथ ही पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष पद का दायित्व संभाल रहे डा. आशीष गोयल ने कहा कि अधिक हानियों वाले क्षेत्रों में अभियान चलाकर विशेष प्रयास से एक वर्ष (वर्ष 2024-25 के मुकाबले वर्ष 2025-26 में) में ही घाटे में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे नये क्षेत्रों में भी तेजी से प्रयास किए जाएं जहां अभी एटीएंडसी हानियां ज्यादा हैं।

अभियान के तहत पांचों विद्युत वितरण निगमों के 42.45 लाख उपभोक्ताओं (कुल उपभोक्ताओं का लगभग 11 प्रतिशत) वाले 1682 फीडर के 731 क्लस्टर की नियमित राजस्व वसूली की समीक्षा, फीडरों की निगरानी आदि के जरिए बिलिंग सुधार किया गया। अभियान के दौरान कभी बिल का भुगतान नहीं करने वाले तथा लंबे समय से बिल के बकायेदार उपभोक्ताओं से 654.31 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली भी की गई। इसके साथ ही साथ ही 88,449 नए विद्युत कनेक्शन दिए गए। बैठक में कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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90 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है हानियां
प्रदेशवासियों को महंगी बिजली देने के बावजूद बिजली कंपनियों के जबरदस्त घाटे का बड़ा कारण बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी ही रही है। घाटे से निपटने के लिए राज्य सरकार लगातार वित्तीय मदद देती रही है लेकिन घाटा बढ़ता ही रहा। घाटे से उबरने के लिए मौजूदा प्रबंधन ने तकनीक का सहारा लेते हुए व्यापक अभियान चलाया तो 90 प्रतिशत से भी अधिक एटीएंडसी सामने आई। अतर्रा के नरैनी फीडर पर पिछले वर्ष जुलाई तक 92.89 प्रतिशत हानियां थी जो बिजली चोरी पर अंकुश से अब 28 प्रतिशत से अधिक घटकर 64 प्रतिशत रह गई है।

इसी तरह नोएडा के दुजाना में 86 प्रतिशत, फीडर नंबर छह में 66 प्रतिशत, देवबंद टाउन-1ए में 72 प्रतिशत, आगरा के बरौली में 76 प्रतिशत, मथुरा के राल में 83, कोसी के बठैन, गोंडा के उमरी. बदायूं के टाउन-1, सुल्तानपुर के काशीराम, बैरिया के सरसपाली. गोपीगंज, प्रयागराज के मुंगारी आदि फीडर बड़े पैमाने पर होती रही बिजली चोरी पर अंकुश लगने से हानियों में कमी आई है।