यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी, 3 साल से जमे कर्मियों का मांगा रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी है। तीन साल से अधिक समय ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
विधानसभा चुनाव से पहले यूपी पुलिस में फेरबदल की तैयारी।
तीन साल से अधिक तैनात कर्मियों का होगा तबादला।
पूरे प्रदेश से पुलिसकर्मियों का ब्योरा तलब किया गया।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी है। एक ही थाना या चौकी पर तीन साल से अधिक समय से तैनात पुलिसकर्मियों को हटाया जा सकता है। इसके लिए पूरे प्रदेश से ऐसे पुलिसकर्मियों का ब्योरा तलब किया गया है। सूची तैयार होने के बाद लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे पुलिसकर्मियों की तैनाती बदले जाने की कार्रवाई की जा सकती है।
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पुलिसकर्मियों की तैनाती की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों को हटाकर दूसरे स्थानों पर भेजने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
कैसे लिया जा सकता है निर्णय?
इससे स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बने प्रभाव और संपर्कों को लेकर उठने वाले सवालों को भी दूर करने में मदद मिलेगी।
प्रदेशभर से मांगे गए ब्योरे में पुलिसकर्मियों की तैनाती की अवधि का विवरण जुटाया जा रहा है। इसके आधार पर तीन साल से अधिक समय से एक ही थाना या चौकी पर तैनात कर्मियों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के स्तर पर तबादलों को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
विधानसभा चुनाव से पहले पुलिसकर्मियों की तैनाती में बदलाव की प्रक्रिया चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप भी महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी ऐसे पुलिसकर्मियों को अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा या किसी श्रेणी के कर्मियों को नियमों के तहत छूट मिलेगी।
यह भी पढ़ें- BJP कार्यसमिति की बैठक में शिरकत करेंगे अमित शाह, यूपी के 2850 भाजपाइयों के साथ चुनावी रणनीति पर करेंगे मंथन
ब्योरा जुटाए जाने के बाद अब पुलिस मुख्यालय के अगले कदम पर नजर है। यदि तीन साल की अवधि को आधार बनाकर तबादले किए जाते हैं, तो प्रदेश के कई थानों और चौकियों में तैनाती व्यवस्था बदल सकती है।
