यूपी में PCS अधिकारियों के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू, 4 चरणों में 12 महीने दी जाएगी ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारियों के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू की है। इसके तहत अधिकारियों को चार चरणों में 12 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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HighLights
पीसीएस अधिकारियों के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू।
चार चरणों में कुल 12 माह का प्रशिक्षण।
कानून, राजस्व, एआई जैसे विषय शामिल।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) के अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने के लिए नई प्रशिक्षण नीति निर्धारित की गई है, राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारियों को जिम्मेदारी संभालने के लिए चार चरणों में 12 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके बाद सेवा के अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण होगा। प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में कानून, राजस्व, वित्त, विकास योजनाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
नियुक्ति के समय लखनऊ स्थित डा. राममनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम) में दो माह का आधारभूत प्रशिक्षण होगा। इसमें लोक प्रशासन, राजस्व, निर्वाचन, आपदा प्रबंधन, सेवा नियम, संविधान, प्रमुख कानून संहिताओं, बजट, वित्तीय स्वीकृति, कोषागार, आंकड़ों के विश्लेषण और एआइ की जानकारी दी जाएगी।
व्यावहारिक इस्तेमाल की दी जाएगी जानकारी
इसके बाद दो माह के व्यावसायिक प्रशिक्षण के पहले चरण में राजस्व कानून, कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। फिर छह माह जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यालयों में कार्य के दौरान प्रशिक्षण होगा। अंतिम दो माह के व्यावसायिक प्रशिक्षण में राजस्व वादों, न्यायिक आदेश लेखन, निर्वाचन और कानूनों के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
सेवा के पांच वर्ष पूरे होने के बाद छठे से नौवें वर्ष के बीच चार सप्ताह का प्रशिक्षण होगा। इसमें नगर मजिस्ट्रेट, एडीएम, अपर नगर आयुक्त और चीनी मिल के महाप्रबंधक जैसे पदों की जिम्मेदारियों के अनुरूप अधिकारियों की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए सार्वजनिक नीति, परियोजना प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय प्रबंधन, ग्रामीण-शहरी विकास और एआइ के उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद 11वें से 14वें वर्ष के बीच चार सप्ताह का दूसरा प्रशिक्षण होगा। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, उद्योग और कृषि संबंधी नीतियों, तकनीकी नवाचारों तथा अन्य राज्यों और देशों की बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन कराया जाएगा।
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प्रोन्नत उप जिलाधिकारियों के लिए भी चार सप्ताह का इंडक्शन प्रशिक्षण निर्धारित है। इसमें राजस्व कानून, निर्वाचन, वित्त एवं बजट, विकास योजनाओं और सूचना प्रौद्योगिकी की जानकारी दी जाएगी।
