मॉल हो या मार्केट... ODOC के तहत अब हर जगह मिलेगी लखनऊ की गिलौरी और जौनपुर की जलेबी
उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) पहल स्थानीय व्यंजनों को देश-दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी में है।

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।
HighLights
ODOC पहल स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाएगी।
आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग से उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार।
स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पुलक त्रिपाठी, लखनऊ। लखनऊ की गिलौरी से लेकर आगरा के पेठे और जौनपुर की जलेबी तक... उत्तर प्रदेश के हर जिले का अपना खास स्वाद है। अब यही स्वाद स्थानीय बाजारों की सीमाएं तोड़कर देश-दुनिया तक पहुंचने की तैयारी में है।
प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ओडीओसी) पहल को खाद्य उद्योग, माल प्रबंधन और कैटरिंग कारोबार से जुड़े उद्यमियों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला कदम बताया है।
उनका मानना है कि पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर ब्रांडिंग पर ध्यान दिया जाए तो ये उत्पाद बड़े कारोबार का आधार बन सकते हैं। इससे छोटे कारोबारियों, स्थानीय कारीगरों और खाद्य उद्योग से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
टेस्ट आफ उत्तर प्रदेश के एक सत्र में वरिष्ठ उप समाचार संपादक अजय शुक्ल से परिचर्चा में छप्पन भोग के निदेशक रवीन्द्र गुप्ता ने कहा कि ओडीओसी प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों को पहचान दिलाने की सराहनीय पहल है। किसी भी पारंपरिक खाद्य उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए उसके मूल स्वाद और गुणवत्ता को बनाए रखते हुए आधुनिक पैकेजिंग और प्रस्तुति पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने छप्पन भोग की मेवा बाइट का उदाहरण देते हुए बताया कि यह उत्पाद हमारे यहां की पहचान है। जो लंदन के साउथ हाल में, दुबई में करावा, टोरंटो के मुख्य बाजार में तक अपनी पैठ बना चुका है। बिना प्रिजरवेटिव व्यवस्था के लंबे समय तक मेवा बाइट खाने योग्य रहती है।
यही इसकी विशेषता है। प्रदेश के दूसरे पारंपरिक उत्पादों में भी ऐसी ही संभावनाएं हैं। जरूरत उन्हें सही मंच, बाजार और प्रोत्साहन देने की है। लुलु माल के निदेशक जय कुमार ने कहा कि लुलु माल को शहरवासियों का बहुत लगाव मिला रहा है।
खाद्य उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों के लिए भी माल में बड़ा बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं हैं। ओडीओसी के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को माल के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है।
अवध कैटरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय टिक्का ने कहा कि शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में अब पारंपरिक मेन्यू के साथ अलग-अलग जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों की मांग भी बढ़ रही है। ग्राहक खुद बताते हैं कि उन्हें किस जिले का कौन सा खास व्यंजन चाहिए।
लखनऊ की गिलौरी, मुरादाबादी दाल, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा, आगरा का पेठा और चाट, जौनपुर की जलेबी, कालपी की गुझिया और कन्नौज के पारंपरिक उत्पादों को लोग पसंद कर रहे हैं। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल गुप्ता का कहना कि ओडीओसी केवल खानपान की विरासत को संरक्षित करने की योजना नहीं, बल्कि इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था और उद्यमिता से जोड़ने का अवसर भी है।
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