कब्जे और वोटर लिस्ट विवाद पर UP सरकार सख्त, ओखला की जमीन पर कानूनी लड़ाई के लिए नोडल अधिकारी तैनात
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली के ओखला स्थित सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे और मतदाता सूची विवाद को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ।
HighLights
यूपी सरकार ने ओखला जमीन विवाद पर सख्त रुख अपनाया।
सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे और वोटर लिस्ट का विवाद।
कानूनी मामलों की प्रभावी पैरवी हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिल्ली के जामिया नगर, ओखला में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कथित जमीन पर अवैध रूप से बसी खिजर बाबा कालोनी के निवासियों के मतदाता सूची में नाम दर्ज होने का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। प्रदेश सरकार ने अदालतों में लंबित जमीन के मामलों के निस्तारण और प्रभावी पैरवी के लिए अधिशासी अभियंता बीके सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया है।
विभाग के अनुसार, यमुना किनारे बाढ़ नियंत्रण और नहरों के रखरखाव के लिए जमीन का एक हिस्सा लंबे समय से सिंचाई विभाग के अधीन रहा है। आजादी से पहले यह व्यवस्था संयुक्त प्रांत और बाद में उत्तर प्रदेश के अधीन रही। दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यमुना तट से जुड़ी सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की जमीनें उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नाम दर्ज हुयीं। बाद में इस पर कब्जे हो गए।
आगे नहीं बढ़ सकी कार्रवाई
जमीन कब्जे को लेकर अदालत में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद वर्ष 2002 में ओखला, जामिया नगर और पुस्ता रोड से जुड़ी जमीन पर सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला आया। वर्ष 2004 में विभाग ने कुछ हिस्सों से कब्जा खाली करा लिया, लेकिन आबादी वाले क्षेत्रों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
उसी समय 115 लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया, जिसमें दावा किया कि उनके पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बिजली-पानी के बिल जैसे दस्तावेज हैं। उनका कहना था कि संबंधित जमीन पुरानी ग्राम सीमा और लाल डोरा क्षेत्र का हिस्सा है।
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दिसंबर 2025 में अदालत ने सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला दिया। जिसके बाद कालोनी की एक मस्जिद और कुछ मकान सील किये गये। आगे की कार्रवाई से पहले अदालत का नया आदेश आ गया। जिसमें कार्रवाई पर रोक लगा दी गई। फिलहाल मामला अदालत में लंबित है। सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष संदीप ने बताया कि अधिशासी अभियंता बीके सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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उन्हें प्रभावी पैरवी कर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जल्द निस्तारण कराने की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम जोड़ने, हटाने में सिंचाई विभाग का हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब छह एकड़ जमीन को लेकर विवाद चल रहा है।
