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UP News: 13 मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने की नए सिरे से तैयारी, चिकित्सा शिक्षा विभाग फूंक-फूंक कर रख रहा कदम

महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि सभी कॉलेज अपील के लिए जो भी प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं उसे लेकर महानिदेशालय आएं। यहां पर विशेषज्ञों की कमेटी के सामने इन मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य अपना-अपना प्रस्तुतिकरण देंगे। बता दें कि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय में 15 और 16 जुलाई को एक अति आवश्यक बैठक बुलाई गई है।

By Ashish Kumar Trivedi Edited By: Shivam Yadav Wed, 10 Jul 2024 03:20 AM (IST)
13 मेडिकल कालेजों को मान्यता दिलाने को नए सिरे से तैयारी शुरू।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में 13 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता न मिलने का झटका खाने के बाद अब चिकित्सा शिक्षा विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने इन कॉलेजों को मान्यता नहीं दी है। 

ऐसे में अब पुराने नियमों के अनुसार, फिर से मान्यता पाने के लिए अपील की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय में 15 और 16 जुलाई को एक अति आवश्यक बैठक बुलाई गई है। अगर मान्यता मिली तो एमबीबीएस की 1,300 सीटें बढ़ेंगी।

अपील के लिए प्रस्ताव लेकर आएं कॉलेज

महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि सभी कॉलेज अपील के लिए जो भी प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं, उसे लेकर महानिदेशालय आएं। यहां पर विशेषज्ञों की कमेटी के सामने इन मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य अपना-अपना प्रस्तुतिकरण देंगे। फिर उसमें जो भी जरूरी सुधार होगा वह किया जाएगा। फिर एनएमसी के समक्ष अपील की जाएगी। 

जिन जिलों में जिला अस्पतालों को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाया गया है उनमें बिजनौर, कुशीनगर, सुलतानपुर, गोंडा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, चंदौली, बुलंदशहर, सोनभद्र, पीलीभीत, औरैया, कानपुर देहात और कौशांबी शामिल हैं। 

फिलहाल, वर्ष 2023 के नए नियमों के अनुसार अधिक चिकित्सा शिक्षक और सीनियर रेजीडेंट इत्यादि की जरूरत है। वहीं वर्ष 2020 के पुराने नियमों के अनुसार इन मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पद भरे हैं और अन्य मानक भी पूरे हैं।

ऐसे में शैक्षिक सत्र 2024-25 से यहां एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाएगी। वर्ष 2023 के नियमों के अनुसार यह कॉलेज मान्यता के मानकों पर खरे नहीं हैं लेकिन वर्ष 2020 में जब इनका निर्माण हुआ उस समय के पुराने मानकों पर है यह खरे हैं।

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