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UP Nagar Nikay Chunav: निकाय चुनाव को मिली सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, ओबीसी आरक्षण के साथ जारी होगी अधिसूचना

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निकाय चुनाव कराने को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक ओबीसी आरक्षण लागू करते हुए दो दिन में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने की इजाजत दे दी है।

By Shivam YadavEdited By: Shivam YadavPublished: Tue, 28 Mar 2023 12:21 AM (IST)Updated: Tue, 28 Mar 2023 12:21 AM (IST)
दो दिन में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने की इजाजत दे दी है।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो: उत्तर प्रदेश में रुके हुए निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निकाय चुनाव कराने को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण लागू करते हुए दो दिन में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने की इजाजत दे दी है।

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ये आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पार्डीवाला की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के स्टेटमेंट को दर्ज करने के बाद दिए। 

मेहता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने चार जनवरी 2023 के आदेश में दर्ज किया था कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर दिसंबर 2022 में उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। आयोग का कार्यकाल छह महीने का है, लेकिन वह अपना काम 31 मार्च तक पूरा कर लेगा।

मेहता ने कोर्ट को बताया कि आयोग ने गत नौ मार्च को अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और दो दिन में चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। पीठ ने मेहता के स्टेटमेंट को दर्ज करते हुए याचिका निपटा दी और साथ ही कहा कि इस आदेश को नजीर की तरह नहीं लिया जाएगा।

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के गत 27 दिसंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। प्रदेश सरकार ने याचिका में कहा था कि हाई कोर्ट का पांच दिसंबर की ड्राफ्ट अधिसूचना रद करने का फैसला सही नहीं है। 

अधिसूचना में उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव में सीटों में ओबीसी आरक्षण भी लागू किया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट लागू किए बगैर स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू करने को सही नहीं माना था और ड्राफ्ट अधिसूचना रद कर दी थी। 

हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी आरक्षण लागू किए बगैर तत्काल अधिसूचना जारी कर चुनाव कराने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि चुनाव की अधिसूचना तत्काल निकाली जाए, क्योंकि कई निकायों का कार्यकाल 31 जनवरी 2023 तक पूरा होने वाला है।

शीर्ष कोर्ट ने चार जनवरी को लगाई थी अंतरिम रोक

सुप्रीम कोर्ट ने गत चार जनवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट के ओबीसी आरक्षण लागू किए बगैर प्रदेश में निकाय चुनाव कराने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि पिछड़ा वर्ग आयोग ओबीसी आरक्षण पर अपना काम छह महीने के बजाए तीन महीने में (31 मार्च) तक पूरा कर ले। 

इसके साथ ही कोर्ट ने इस बीच स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने पर नए चुनाव होने तक राज्य सरकार को निकायों का रोजाना का कामकाज देखने के लिए हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने की छूट दी थी, लेकिन ये भी कहा था कि ये कमेटी कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेगी।


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