यूपी में पढ़े-लिखे मतदाताओं की बड़ी चूक, विधान परिषद चुनाव में 53 हजार से अधिक वोट निरस्त
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में पढ़े-लिखे मतदाताओं की बड़ी चूक सामने आई है, जहां 11 सीटों पर 53,615 मत ...और पढ़ें
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HighLights
विधान परिषद चुनाव में 53,615 मत अवैध घोषित हुए।
गोरखपुर-फैजाबाद में जीत से नौ गुना अधिक वोट निरस्त।
मतदान प्रक्रिया में चूक से मतदाताओं की जागरूकता पर सवाल।
शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। पढ़े-लिखे मतदाताओं का चुनाव... लेकिन मतदान में ऐसी चूक कि हजारों वोट किसी के भी काम नहीं आए। विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर हुए चुनाव में निरस्त मतों की संख्या 53,615 पहुंच गई। यानी कुल पड़े 6,69,982 मतों में से करीब आठ प्रतिशत मत अवैध घोषित कर दिए गए।
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की है, जहां जीत-हार का अंतर महज 307 मत रहा, जबकि 2,800 मत निरस्त हो गए। यहां निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर से करीब नौ गुना है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि ये मत वैध होते तो क्या चुनाव का परिणाम कुछ और हो सकता था?
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह केवल एक प्रत्याशी के सामने मुहर नहीं लगाते, बल्कि मतपत्र पर अपनी वरीयता अंकित करते हैं। मतदान की इस प्रक्रिया में निर्धारित तरीके से वरीयता दर्ज करना जरूरी होता है।
जरा सी चूक भी मतपत्र को अवैध बना देती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में मतों का निरस्त होना चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं की जागरूकता और प्रशिक्षण पर सवाल खड़े करता है। खास बात यह है कि स्नातक सीट के चुनाव में स्नातक मतदाता ही वोट डालते हैं जबकि शिक्षक सीट के चुनाव में शिक्षक मतदान करते हैं।
गोरखपुर-फैजाबाद का सीट का आंकड़ा इस पूरे चुनाव का सबसे दिलचस्प और गंभीर पहलू सामने रखता है। यहां जीत का अंतर 307 मत रहा, जबकि 2,800 मत निरस्त हुए। हालांकि निरस्त मतों को किसी प्रत्याशी के पक्ष में मान लेना उचित नहीं होगा, लेकिन इतने करीबी मुकाबले में इनकी संख्या चुनाव परिणाम की अहमियत को जरूर रेखांकित करती है। सवाल यह भी है कि शिक्षक और स्नातक जैसे जागरूक मतदाता वर्ग के बीच मतदान से पहले वरीयता अंकित करने की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त जानकारी पहुंचाई क्यों नहीं जाती है।
किस सीट पर कितने पड़े वोट व निरस्त हुए वोट मतदान विवरण
| क्रमांक | सीट | कुल मत | निरस्त मत |
|---|---|---|---|
| 1 | मेरठ शिक्षक | 31,214 | 2,809 |
| 2 | मेरठ स्नातक | 45,438 | 3,976 |
| 3 | इलाहाबाद-झांसी स्नातक | 1,09,482 | 9,596 |
| 4 | गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक | 43,611 | 2,800 |
| 5 | आगरा शिक्षक | 31,993 | 2,128 |
| 6 | आगरा स्नातक | 91,338 | 5,852 |
| 7 | बरेली-मुरादाबाद शिक्षक | 35,161 | 3,183 |
| 8 | लखनऊ स्नातक | 1,23,444 | 11,233 |
| 9 | लखनऊ शिक्षक | 25,835 | 936 |
| 10 | वाराणसी शिक्षक | 22,943 | 1,439 |
| 11 | वाराणसी स्नातक | 1,09,523 | 9,663 |
सपा को मिले भाजपा से 3,123 अधिक मत
एमएलसी की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा भले ही छह सीटें जीतकर सपा से आगे रही हो, लेकिन उसे मुख्य विपक्षी दल से कम वोट मिले हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को कुल 2,61,379 मत मिले हैं, जबकि पांच सीटें जीतने वाली सपा के प्रत्याशियों के खाते में 2,64,502 वोट आए हैं।
इस तरह सपा प्रत्याशियों को भाजपा से 3,123 मत अधिक मिले हैं। पांच स्नातक सीटों में सपा को कुल 2,12,116 मत मिले, जबकि भाजपा को 1,75,259 मत प्राप्त हुए। इसके साथ ही छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को 86,120 और सपा प्रत्याशियों को 52,386 मत मिले हैं।
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