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UP MLC Result 2026: वाराणसी से आगरा तक सपा ने दिखाया दम, शिक्षित वर्ग के फैसले से दिया सियासी संदेश

Published: Wed, 28 Oct 2026 10:19 PM (IST)

विधान परिषद चुनाव में सपा ने भाजपा को झटका देते हुए वाराणसी से आगरा तक मजबूत प्रदर्शन किया है। शिक्षित ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सपा ने विधान परिषद चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया।

  2. वाराणसी और आगरा में भाजपा को बड़ा झटका लगा।

  3. शिक्षित मतदाताओं के फैसले से सपा को नई ऊर्जा।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। विधान सभा चुनाव से पहले विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पिछले चुनाव के मुकाबले अपनी बढ़त और संघर्षपूर्ण सीटों पर मजबूत प्रदर्शन से सपा ने भाजपा को झटका दिया है। भाजपा भले ही अपनी सीटों के आंकड़े के बराबर रहने की दुहाई दे रही हो, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हार और गोरखपुर में मिली कठिन जीत ने पार्टी को बेचैन किया है। आगरा में पुनर्मतदान और सपा प्रत्याशी की जीत से भी सपा फ्रंटफुट पर है।

पार्टी नतीजों को अपने मुद्दों और नैरेटिव की जीत मान रही है। चुनाव पढ़े-लिखे मतदाताओं का था और इन वर्ग को चुनावी माहौल बनाने के लिए भी अहम माना जाता है, ऐसे में सपा को विधान सभा चुनाव के लिए नई ऊर्जा मिली है।

विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें वाराणसी की शिक्षक व स्नातक सीट और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीटें सपा के पास थीं। बुधवार देर शाम तक घोषित परिणामों में सपा वाराणसी शिक्षक, इलाहाबाद-झांसी स्नातक और आगरा शिक्षक सीट जीत चुकी थी, जबकि वाराणसी स्नातक और लखनऊ स्नातक सीट पर निर्णायक बढ़त से आगे है। चुनाव में सपा ने इस बार विधान सभा चुनाव की तरह ही प्रचार से मतदान तक बड़ी संख्या में नेताओं को जिम्मेदारी दी थी।

आगरा में निर्दलीय एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल और गोरखपुर में भाजपा के बागी डा. संजयन त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया था, वह भी पूर्व घोषित प्रत्याशियों को हटाकर। आगरा के चुनाव में विवाद हुआ। बूथ कैप्चरिंग के आरोप के बाद आयोग ने तीन बूथों पर पुनर्मतदान भी कराया। इस सीट पर भाजपा की रणनीति ध्वस्त नजर आई।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जीत सपा के लिए भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मुकाबले की गुंजाइश का संकेत है। विधान परिषद चुनाव का मतदाता वर्ग सीमित जरूर है, परंतु यह अपने सामाजिक दायरे में राय बनाने वाला है। ऐसे में परिणाम को संगठन के प्रभाव और शिक्षित मध्यवर्ग के बीच पकड़ के तौर पर भी देखा जाएगा। अब सपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ जनता के बीच भी यह विश्वास पैदा करने की कोशिश करेगी कि भाजपा को उसके गढ़ में भी हराया जा सकता है।

इस बीच सपा ने आगरा के चुनाव के सहारे वैश्य समाज को भी पीडीए का हिस्सा बताकर अपने सामाजिक समीकरण के विस्तार का भी दांव चला है। पार्टी शिक्षक भर्ती, पुरानी पेंशन, शिक्षामित्रों की समस्याएं, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों पर अपने नैरेटिव के सही होने का संदेश देगी।

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