लखनऊ में खून के सौदागरों पर कसा गया शिकंजा, सात ब्लड सेंटरों का संचालन हुआ बंद
एसजीपीजीआई में पैसे लेकर रक्तदान के मामले के बाद एफएसडीए ने लखनऊ में प्रदेशव्यापी अभियान चलाया। जांच में तीन चैरिटेबल ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
एसजीपीजीआई में पैसे लेकर रक्त देने का मामला सामने आया।
एफएसडीए ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर जांच की।
लखनऊ के तीन ब्लड सेंटरों का संचालन रोक दिया गया।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। मरीज को खून की जरूरत और इसी मजबूरी को कमाई का जरिया बनाने का खेल! संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में रुपये लेकर रक्तदान करने पहुंचे इंजीनियरिंग छात्रों का मामला सामने आने के बाद रक्तदान की व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठे। दैनिक जागरण ने इस मामले में रक्तदाताओं के रिकॉर्ड से लेकर ब्लड बैंकों में हो रही धांधली की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
खबर का असर रहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की प्रदेशव्यापी अभियान चलाया। जिसमें चैरिटेबल ब्लड सेंटरों की कार्यप्रणाली में भी गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। अभियान के तहत जिले के तीन केंद्रों पर छापेमारी हुई। यहां जांच में कहीं अनिवार्य संक्रमण परीक्षण के बिना रक्त जारी करने की बात सामने आई तो कहीं तकनीकी कर्मचारी और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ही नदारद मिले। तापमान नियंत्रण, रक्त के भंडारण और स्टाक रजिस्टर के रखरखाव में भी लापरवाही मिली।
बीते सप्ताह एसजीपीजीआई में इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा पैसे लेकर ब्लड दिए जाने का मामला पकड़ में आया था। बुधवार को एएफएसडीए आयुक्त डा. रोशन जैकब के निर्देश पर चलाए गए अभियान में जिले के जिन तीन केंद्रों के संचालन पर रोक लगाई गई है, उनमें मोहनलालगंज स्थित शेखपुर हबीबपुर में लिटल स्टार, पक्का बाग स्थित रामा चैरिटेबल और सरोजनी नगर कानपुर रोड स्थित केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर शामिल हैं।
लिटल स्टार ब्लड सेंटर में एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद जांच किए बिना रक्त और रक्त घटक जारी किए जा रहे थे। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी भी लंबे समय से अनुपस्थित मिले। रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में अनिवार्य जांच पूरी किए बिना रक्त जारी करने, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत रखने और तय दर से अधिक शुल्क वसूलने की अनियमितताएं मिलीं। केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर में चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित थे।
