विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ललितपुर समेत UP के इन 4 जिलों में मिला बेशकीमती खजाना, खनन शुरू होने से पहले 40 गांवों की तस्वीर बदलेगी योगी सरकार

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:31 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के ललितपुर, झांसी, महोबा और सोनभद्र जिलों में नए खनिज भंडारों की तलाश तेज होने से 40 गांवों का विकास होगा।

News Article Hero Image

HighLights

  1. खनन प्रभावित 40 गांवों में डीएमएफ की 70% राशि खर्च होगी।

  2. ललितपुर, झांसी, महोबा, सोनभद्र में नए खनिज भंडारों की तलाश तेज।

  3. पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास पर होगा विशेष ध्यान।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। खनिज संपदा मिलने से राज्य के ललितपुर, झांसी, महोबा और सोनभद्र जिलों के 40 गांवों में विकास की नई तस्वीर बन सकती है। नए ब्लाकों से खनन शुरू होते ही जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्र के गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च किया जाएगा। यानी जिस जमीन से खनिज निकलेगा, वहां के गांवों तक खनन से अर्जित राजस्व का हिस्सा विकास कार्यों के रूप में पहुंचेगा।

ललितपुर के पाहाड़ी कलां और गोरा कलां में फास्फोराइट का भंडार इसका उदाहरण है। एमईसीएल (मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड) की अन्वेषण रिपोर्ट के अनुसार 13.93 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1.909 करोड़ टन जमीन में मौजूद शुद्ध खनिज संसाधन (इन-सिटू संसाधन) होने की संभावना है। इस क्षेत्र में सोनरई, जालंधर, पाहाड़ी कलां, गोरा कलां, पिपरट, बम्हौरी कलां और पिसनारी गांव आते हैं। इन गांवों के विकास की रूपरेखा तैयार हो रही है।

परमाणु खनिजों के अन्वेषण की तीन परियोजनाएं शुरू

सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म माला श्रीवास्तव का कहना है कि वर्ष 2026-27 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 15 परियोजनाएं ललितपुर, झांसी और सोनभद्र में शुरू हुई हैं। वहीं, राज्य के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की चार परियोजनाएं झांसी, महोबा और ललितपुर में शुरू हुई हैं। सोनभद्र में परमाणु खनिजों के अन्वेषण की तीन परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं।

श्रीवास्तव ने बताया कि संशोधित नियमावली के तहत खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ की राशि खर्च की जाएगी। इसमें 70 प्रतिशत राशि पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका पर खर्च की जाएगी, जबकि शेष राशि भौतिक ढांचे, सिंचाई और वैकल्पिक ऊर्जा से जुड़े कार्यों में लगाई जा सकती है।

यह भी पढ़ें- झांसी में बड़ा हादसा, सुखनई नदी में डूबने से पिता-पुत्र समेत 5 लोगों की मौत

निदेशक के अनुसार राज्य के खनिज राजस्व में औसतन 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हुई है। पिछले र्षष मुख्य खनिजों से 608.11 करोड़ रुपये राजस्व मिला। दूसरी ओर, 16 जिलों में 10 पट्टाधारकों से वसूली जाने वाली 55.04 करोड़ रुपये की रायल्टी के मुकाबले केवल 7.43 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। इसी तरह 20 पट्टाधारकों से डीएमएफ का 13.71 करोड़ रुपये का अंशदान जमा नहीं कराया गया है।