यूपी के सरकारी कॉलेज में नहीं बढ़ी MBBS की एक भी सीट, प्राइवेट कॉलेजों में 1200 Seat की बढ़ोत्तरी
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की एक भी सीट नहीं बढ़ी, जबकि निजी कॉलेजों में 1,200 सीटें बढ़ी हैं।

सरकारी कॉलेज में नहीं बढ़ी MBBS की एक भी सीट।
HighLights
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें नहीं बढ़ीं।
निजी मेडिकल कॉलेजों में 1,200 एमबीबीएस सीटें बढ़ीं, कुल 8,700 हुईं।
गरीब छात्रों के लिए महंगी मेडिकल शिक्षा की चिंता बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। चिकित्सा शिक्षा में लंबी छलांग लगाने का दावा कर रही राज्य सरकार वर्ष 2026 के शैक्षणिक सत्र में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की एक भी सीट नहीं बढ़ा सकी। इसके विपरीत निजी मेडिकल कॉलेजों और इंस्टीट्यूट में एमबीबीएस की 1,200 सीटें बढ़ी हैं।
इसके बाद प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 8,700 हो गई है। वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की सीटें 5,700 पर ही ठहर गई हैं।
मेडिकल शिक्षा में निजी क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है और एमबीबीएस सीटों में उसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की ओर से जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार, प्रदेश के 16 निजी मेडिकल कॉलेजों में नीट-2026 के माध्यम से होने वाले प्रवेश के लिए एमबीबीएस की 1,200 सीटें बढ़ाई गई हैं।
आजादी से पहले प्रदेश में स्थापित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर जैसे प्रमुख संस्थानों में एमबीबीएस की एक भी सीट नहीं बढ़ी है। इन संस्थानों में प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रथम विकल्प चुनते हैं। वर्तमान में प्रदेश में 49 सरकारी और 43 निजी मेडिकल कॉलेज हैं।
नए सीट मैट्रिक्स के बाद उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों की संख्या 13,200 से बढ़कर 14,400 हो गई है। इन मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की ओर से काउंसिलिंग कराई जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा की महानिदेशक नेहा शर्मा का कहना है कि चिकित्सा विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थाएं हैं, उन्हें सीट बढ़ाने के लिए एनएमसी में दावा करना चाहिए था। तकनीकी कारणों से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ीं जो कमियां रह गयी हैं, उन्हें दूर कर अगले सत्र में सीट बढ़वाने का प्रयास होगा।
इन निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ीं सीटें
- यूनाइटेड इंस्टीट्यूट, प्रयागराज- 100 सीटें बढ़ीं
- सरदार पटेल इंस्टीट्यूट- 100 सीटें, नया कॉलेज
- अजय संगाल इंस्टीट्यूट- 50 सीटें बढ़ीं
- फूलन सिंह मेडिकल कॉलेज- 150 सीटें, नया कॉलेज
- हेरिटेज इंस्टीट्यूट- 50 सीटें बढ़ीं
- इंटीग्रल इंस्टीट्यूट- 50 सीटें बढ़ीं
- केएमसी मेडिकल कॉलेज- 50 सीटें बढ़ीं
- केएम मेडिकल कॉलेज- 50 सीटें बढ़ीं
- मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज- 50 सीटें बढ़ीं
- नोएडा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट- 100 सीटें बढ़ीं
- प्रसाद मेडिकल साइंसेज- 100 सीटें बढ़ीं
- रामा मेडिकल कॉलेज- 100 सीटें बढ़ीं
- राधा गोविंद इंस्टीट्यूट- 50 सीटें, नया कॉलेज
- कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज- 50 सीटें, नया कॉलेज
- प्रसाद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल- 50 सीटें, नया कॉलेज
- आरएसएस मेडिकल कॉलेज- 50 सीटें, नया कॉलेज
गरीब मेधावी छात्रों की चिंता बरकरार
निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बढ़ने से विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसर जरूर बढ़ेंगे, लेकिन इसका सबसे अधिक असर अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा। निजी कॉलेजों में एमबीबीएस की न्यूनतम फीस तकरीबन 11 लाख रुपये सालाना से शुरू होती है।
वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अधिकतम फीस लगभग 60 हजार रुपये वार्षिक है। ऐसे में विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि यदि सीटों में बढ़ोतरी सरकारी कॉलेजों में की जाती तो गरीब और मेधावी विद्यार्थियों को कम शुल्क में एमबीबीएस करने का बेहतर अवसर मिलता। निजी कॉलेजों में बढ़ी सीटें अवसर बढ़ाने के साथ आर्थिक असमानता की चुनौती भी बढ़ा सकती हैं।
