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पीजी डॉक्टरों के अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पर हाई कोर्ट का फैसला, नियुक्ति में देरी से खत्म नहीं होगी शर्तें

Published: Wed, 23 Sep 2026 01:54 AM (IST)

लखनऊ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि सरकारी मेडिकल संस्थानों से रियायती दर पर पीजी शिक्षा प्राप्त करने वाले ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. सरकारी पीजी डॉक्टर अनिवार्य सेवा बांड से नहीं हट सकते पीछे।

  2. नियुक्ति में देरी से भी बांड की बाध्यता समाप्त नहीं होगी।

  3. हाई कोर्ट ने डॉक्टर के लिए नई काउंसलिंग का निर्देश दिया।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि सरकारी मेडिकल संस्थानों में रियायती दर पर स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का लाभ लेने वाले डाक्टर अनिवार्य सरकारी सेवा बांड की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के समय दो वर्ष की अनिवार्य सेवा की शर्त इसलिए रखी गई है, ताकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बनी रहे और मरीजों के जीवन के अधिकार की रक्षा हो सके।

प्रशासनिक स्तर पर नियुक्ति में कुछ देरी होने मात्र से बांड की बाध्यता समाप्त नहीं हो जाती।न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की पीठ ने एसजीपीजीआइ, लखनऊ से एमडी (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) करने वाली डा. अपारूपा सेन गुप्ता की याचिका पर यह टिप्पणी की। डॉक्टर ने दावा किया था कि पाठ्यक्रम पूरा होने के तीन महीने के भीतर सरकार की ओर से सेवा उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनका दो वर्ष का अनिवार्य सेवा बांड समाप्त माना जाए।

कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कहा कि डाक्टर ने पीडीसीसी (पोस्ट डाक्टरल सर्टिफिकेट कोर्स) पाठ्यक्रम करने के लिए सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया था, जिसमें स्पष्ट था कि पीडीसीसी की अवधि बांड सेवा में नहीं गिनी जाएगी। उत्तर प्रदेश में ऐसा कोई प्रविधान भी नहीं है, जिसके तहत तीन महीने में नियुक्ति न मिलने पर बांड स्वतः समाप्त हो जाए। हालांकि, कोर्ट ने डाक्टर को बांड सेवा के लिए काउंसिलिंग का अवसर नहीं दिए जाने पर सरकार के आदेश में हस्तक्षेप किया।

एक जून 2026 की काउंसलिंग अधिसूचना 2022 बैच के एमडी/एमएस और 2023 बैच के डिप्लोमा अभ्यर्थियों के लिए थी, जबकि याची 2021 बैच की थी। इसलिए उसे काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर नहीं मिला।कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीएमई) को नए सिरे से काउंसलिंग कराने और एनएमसी से मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों व शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध रिक्त सीटों में से संस्थान चुनने का अवसर देने का निर्देश दिया है।

प्रक्रिया 27 सितंबर 2026 से चार सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही पीडीसीसी के बाद एसजीपीजीआइ में वरिष्ठ रेजीडेंट के रूप में की गई 89 दिन की सेवा को दो वर्ष की बांड सेवा अवधि में समायोजित करने को कहा गया है। काउंसलिंग पूरी होने तक डाक्टर एसजीपीजीआइ में वरिष्ठ रेजीडेंट के रूप में काम जारी रखेंगी।

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