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लखनऊ के इटौंजा टोल प्लाजा का सर्वर ले गई एसटीएफ, बिना टैक्स गुजर रहे वाहन

Published: Wed, 23 Sep 2026 12:14 AM (IST)

एसटीएफ ने लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के इटौंजा टोल प्लाजा का सर्वर जब्त कर लिया है, जिससे टोल वसूली ठप हो ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा का सर्वर किया जब्त।

  2. सर्वर सीज होने से टोल वसूली हुई पूरी तरह बंद।

  3. एनएचएआई और टोल एजेंसी ने कार्रवाई का किया विरोध।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) के इटौंजा टोल प्लाजा का सर्वर मंगलवार को एसटीएफ ने सीज कर दिया। करीब एक घंटे तक सर्च आपरेशन चलाने के बाद टीम सर्वर अपने साथ ले गई। इसके बाद टोल वसूली ठप हो गई और वाहन बिना टैक्स दिए गुजरने लगे।

इस कार्रवाई को लेकर एसटीएफ और एनएचएआई के बीच स्थिति आमने-सामने की हो गई है। एसटीएफ ने जनवरी से मार्च 2026 तक की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मांगी थी। टोल संचालक एजेंसी के अनुसार प्लाजा पर करीब एक माह पुरानी रिकार्डिंग ही सुरक्षित रहती है। इसके बाद एसटीएफ ने कोर्ट से आदेश लिया और मंगलवार को प्लाजा का डाटा खंगाला। जांच में अधिक समय लगने पर सर्वर सीज कर अपने साथ ले गई।

एसटीएफ ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कोर्ट के आदेश के आधार पर की गई है। एनएचएआइ और टोल संचालक एजेंसी लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड ने सर्वर सीज किए जाने पर विरोध जताया है। एजेंसी के अनुसार एक जनवरी से 31 मार्च 2026 तक वाहनों का डाटा और फास्टैग लेनदेन की जानकारी पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। उसका कहना है कि सर्वर भी पत्राचार के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता था।

एनएचएआइ के परियोजना निदेशक नवरत्न ने बताया कि एसटीएफ अधिकारियों ने जांच पूरी होने के बाद जल्द सर्वर लौटाने की बात कही है। टोल एजेंसी के अनुसार, एसटीएफ ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि टोल पर किस गड़बड़ी की जांच की जा रही है। एनएचएआइ ने भी एसटीएफ को 28 से 30 पन्नों में मांगी गई समग्र जानकारी उपलब्ध कराई थी।

टोल के रेजीडेंट इंजीनियर प्रमोद सिंह ने बताया कि उन्हें किसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं है। एसटीएफ के विशेषज्ञ स्वयं सर्वर की जांच कर रहे थे और इस दौरान टोल कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था। एजेंसी के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था में करीब 15 दिन लग सकते हैं। इस दौरान रोज 18 से 20 लाख रुपये राजस्व नुकसान होने का अनुमान है। राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रतिदिन करीब 42 से 45 हजार वाहन गुजरते हैं।

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