लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश के 35 हजार से अधिक ग्राम रोजगार सेवकों को अब 5280 रुपये की जगह 7500 रुपये नकद मिलेंगे, बाकी धनराशि कर्मियों के ईपीएफ में जमा होगी। इसी तरह से अन्य संविदा कर्मियों को बढ़ा हुआ भुगतान मिलेगा। ग्राम्य विकास विभाग महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ईपीएफ की पूरी कटौती पहले की तरह कर्मचारियों के मानदेय से ही कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम रोजगार सेवकों का मानदेय 6780 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की घोषणा की थी।

मनरेगा कर्मचारी सम्मेलन में चार अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम रोजगार सेवकों सहित अन्य कर्मियों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था, वह इसी माह से प्रभावी हो रहा है। ग्राम्य विकास विभाग अभी तक की व्यवस्था में कर्मचारियों के वेतन के सापेक्ष 25 प्रतिशत भविष्य निधि का धन जमा किया जाता था। इसमें 12 प्रतिशत कर्मचारी के वेतन से और 13 प्रतिशत नियोक्ता की ओर से जमा किया जाता रहा है।

ग्राम रोजगार सेवक को ही मिलने वाले 6000 रुपये मानदेय में से 12 प्रतिशत कटौती करने से उन्हें 5280 रुपये नकद मानदेय मिलता था और सरकार की ओर से पीएफ में 13 प्रतिशत अंशदान देने से कुल मानदेय 6780 रुपये हो जाता था। इसी तर्ज पर ग्राम्य विभाग ईपीएफ की कटौती दस हजार रुपये में पहले की तरह करेगा। अब ग्राम रोजगार सेवकों को मानदेय नकद 7500 रुपये मिलेंगे।

इसका ग्राम रोजगार सेवक संघ विरोध कर रहा है, उसका कहना है कि पूरा दस हजार रुपये नकद दिया जाए और ईपीएफ इसके अलावा दिया जाए। अपर मुख्य सचिव ग्राम विकास मनोज कुमार सिंह ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक सहित किसी मानदेय कर्मी को कोई नुकसान नहीं है। घोषणा के अनुसार मानदेय बढ़ा है और कटौती भी पहले की तरह ही की जा रही है, नियमों में कोई बदलाव नहीं है।

Edited By: Umesh Tiwari