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NCR में PUC सर्ट‍िफ‍िकेट के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, योगी सरकार लागू करेगी नई व्‍यवस्‍था

Published: Wed, 03 Jun 2026 04:53 PM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को 30-35% कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत 1 अक्टूबर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मुख्य सचिव की बैठक में वायु प्रदूषण 30-35 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य

  2. पुराने वाहनों, औद्योगिक उत्सर्जन और सड़कों की धूल कम करने पर फोकस

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा से मुकाबले के लिए प्रदेश सरकार ने रणनीति पर अमल तेज कर दिया है। पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाने से लेकर उद्योगों की ऑनलाइन निगरानी, सड़कों की मशीनों से सफाई और कचरा प्रबंधन तक बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एक अक्टूबर से एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर 'नो प्रदूषण प्रमाणपत्र, नो फ्यूल' व्यवस्था लागू होगी।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस वर्ष एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय करते हुए सभी विभागों को समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी प्रमुख गतिविधियों की डिजिटल मानिटरिंग के लिए पोर्टलों, मोबाइल एप्लीकेशनों, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और डैशबोर्ड का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि एनसीआर के जिलों में 26.19 लाख वाहनों की पहचान की गई है जो अपना समय पूूरा कर चुके हैं। जनवरी से अप्रैल के बीच 37,156 वाहनों को स्क्रैप किया गया, जबकि 460 वाहनों को जब्त किया गया। सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें फिलहाल 100 ई-बसें चल रही हैं।

वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए एनसीआर क्षेत्र में 43 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। इनमें 25 स्टेशन संचालित हैं, जबकि 18 नए स्टेशन अक्टूबर तक स्थापित होंगे। औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के तहत 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 उद्योगों में आनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़ा जा चुका है।

सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें लगभग 3,666 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अभी तक 143.8 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास हुआ है। वहीं, मशीनों से सड़क सफाई के लिए 108 मशीनों की जरूरत के मुकाबले 45 मशीनें उपलब्ध हैं और 50 नई मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है।

निर्माण एवं पुराने भवनों का मलबा प्रबंधन के तहत 37 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाने हैं, जिनमें से 29 संचालित हो चुके हैं। निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, जियो-टैगिंग और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर आधारित प्रणाली विकसित की जा रही है। पौधारोपण, पराली प्रबंधन, कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की स्थापना, ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, मेट्रो और आरआरटीएस विस्तार तथा अंतिम मील कनेक्टिविटी को भी वायु गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है।

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