आकांक्षी ब्लॉकों की जमीनी हकीकत परखेगी सरकार, यूपी के 42 जिलों में विशेष सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे पड़ताल
उत्तर प्रदेश सरकार 42 जिलों के 108 आकांक्षी विकासखंडों में चल रही योजनाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करेगी। विशेष ...और पढ़ें
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HighLights
42 जिलों के 108 आकांक्षी विकासखंडों का होगा स्थलीय निरीक्षण।
विशेष सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे जमीनी पड़ताल।
50 संकेतकों पर प्रगति, स्कूल-अस्पताल आदि का होगा मूल्यांकन।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आंकड़ों में विकास की तस्वीर अब जमीन पर भी परखी जाएगी। प्रदेश के 42 जिलों के 108 आकांक्षी विकासखंडों में सरकार की योजनाओं से कितना बदलाव आया, इसकी हकीकत जानने के लिए विशेष सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारी गांवों तक पहुंचेंगे। पांच और छह अक्टूबर को होने वाले दो दिवसीय स्थलीय निरीक्षण में अफसर न केवल 50 तय संकेतकों पर प्रगति की जांच करेंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्राम पंचायत और स्वयं सहायता समूहों के कामकाज को भी मौके पर देखेंगे।
नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बुधवार को इस संबंध में सभी नामित नोडल अधिकारियों को निर्देश जारी किए। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक हुए भौतिक बदलावों का आकलन करने के साथ ही अपनी रिपोर्ट नौ अक्टूबर तक नियोजन विभाग के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि व संबद्ध सेवाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक विकास समेत पांच क्षेत्रों के 50 संकेतकों के आधार पर प्रगति की निगरानी की जा रही है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के साथ बैठक कर योजनाओं की उपलब्धियों की समीक्षा भी होगी। विकास खंड मुख्यालय पर खंड विकास अधिकारी, आकांक्षी ब्लाक फेलो और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ राज्य औसत के मुकाबले प्रगति की स्थिति और ब्लाक डेवलपमेंट स्ट्रेटेजी (बीडीएस) की भी समीक्षा की जाएगी।
नोडल अधिकारी विद्यालयों में पेयजल, बिजली, फर्नीचर और शौचालय की स्थिति देखेंगे। साथ ही विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात और विशेष जरूरत वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता भी जांची जाएगी। स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों पर लोगों को मिल रही सेवाओं का भी स्थलीय सत्यापन होगा।
ग्राम पंचायतों और पंचायत सचिवालयों में पंचायत सहायक तथा डाटा एंट्री/कंप्यूटर आपरेटर की उपलब्धता देखी जाएगी। इसके अलावा पोषण पुनर्वास केंद्र, रिसोर्स रिकवरी सेंटर और स्वयं सहायता समूह केंद्रों का भी निरीक्षण होगा। जिन ब्लाकों को नीति आयोग या प्रदेश सरकार से प्रोत्साहन राशि मिली है, वहां राशि से प्रस्तावित कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी।
