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सरकारी नौकरियों को लेकर यूपी सरकार ने बदले नियम, अब हिंसक संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी होंगे अयोग्य

Published: Fri, 30 Oct 2026 01:08 AM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधी भर्ती के नियमों को सख्त किया है, जिसके तहत हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य होंगे।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. हिंसक संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य।

  2. 21 वर्ष बाद हिंसक गतिविधियों में शामिल होने पर अयोग्यता।

  3. नए नियमों पर राजनीतिक दलों में तीखी बहस छिड़ी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। अब हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था बदलने के घोषित उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थियों को राज्य सरकार की नौकरियों के लिए अयोग्य माना जाएगा।

नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज ने बुधवार को इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए। ये नियम सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों और शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों पर लागू होंगे।

आदेश के अनुसार, किसी की राजनीतिक विचारधारा सरकारी नौकरी के लिए अयोग्यता का आधार नहीं होगी। हालांकि, ऐसे संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी अयोग्य माने जाएंगे, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करना है।

अधिकारी कर सकते हैं विचार

यदि किसी अभ्यर्थी ने 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन की तारीख से पहले के तीन वर्षों में हिंसक गतिविधियों या मौजूदा व्यवस्था को हिंसा के जरिए बदलने से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया है, तो यह माना जा सकता है कि वह अब भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय है। हालांकि, इस अवधि में उसके आचरण और सोच में सकारात्मक बदलाव के दस्तावेजी साक्ष्य मिलने पर संबंधित अधिकारी विचार कर सकते हैं।

पहले से कार्यरत राज्य सरकार के कर्मचारियों को दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उनके पूर्व मूल विभागों से आवश्यक सेवा अभिलेख मंगाए जा सकेंगे। भर्ती में सत्यापन को लेकर नए नियमों पर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन का अर्थ व्यवस्था बदलना नहीं, बल्कि सत्ता बदलना है। उन्होंने कहा कि सपा केवल लोकतांत्रिक तरीके से, विशेषकर चुनावों के माध्यम से, सरकार बदलने का समर्थन करती है।

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कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि युवाओं के शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन को हिंसा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा युवा आंदोलनों को हिंसक बताने की कोशिश कर रही है। पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करना हिंसा नहीं है। वहीं, भाजपा सांसद राम प्रताप सिंह ने कहा कि अराजकता फैलाने वालों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।