यूपी में खुलेंगी 900 नई कोर्ट, न्यायालयों के लिए 6656 रेगुलर और 2428 आउटसोर्स पोस्टों काे भी मिली मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए 900 नए न्यायालयों और 9084 पदों के सृजन ...और पढ़ें

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HighLights
यूपी सरकार ने 900 नए न्यायालयों के सृजन को दी मंजूरी।
6656 नियमित और 2428 आउटसोर्स पदों का भी होगा सृजन।
लंबित 1.20 करोड़ से अधिक मुकदमों के निस्तारण में मिलेगी मदद।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मुकदमों की लंबी कतार और सीमित न्यायालयों की वजह से त्वरित न्याय की राह में आ रही अड़चन को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने पहले चरण में 900 नए न्यायालयों के साथ उनके सहवर्ती पदों के सृजन का प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
इसमें 6656 नियमित व 2428 आउटसोर्स के पद शामिल हैं। इस निर्णय से अलग-अलग स्तर की अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण की क्षमता बढ़ेगी और आमजन को न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल, प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में मुकदमों का भारी बोझ है। उच्च न्यायालय से प्राप्त विवरण के अनुसार जिला न्यायालयों में 1.20 करोड़ से अधिक वाद लंबित हैं। न्यायालयों की संख्या कम होने के कारण मामलों के शीघ्र निस्तारण में दिक्कत आ रही है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय अदालत प्रबंधन प्रणाली समिति (एनसीएमएससी) की रिपोर्ट के आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विभिन्न श्रेणी की 9149 अदालतों की जरूरत का आकलन किया है।
यूपी के कई जिलों में स्थापित होंगे न्यायालय
इसी के तहत पहले चरण में 900 अदालतों के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इसमें 237 अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, 391 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और 272 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर के न्यायालय बनाए जाएंगे। ये न्यायालय प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और न्यायालयों की आवश्यकता के आकलन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से नए न्यायालयों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले चरण के 900 न्यायालयों और सहवर्ती पदों पर करीब 693.60 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च सरकार पर आएगा।
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इसके अलावा करीब 8.72 करोड़ रुपये का अनावर्ती व्यय प्रस्तावित है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर का खर्च शामिल नहीं है। नए न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों के साथ स्टेनोग्राफर, मुंसरिम, रीडर, वरिष्ठ व कनिष्ठ सहायक समेत अन्य पदों की व्यवस्था होगी।
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प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मौजूदा स्वीकृत पदों की रिक्तियों को भरने के बाद तथा जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने पर ही शुरू की जाएगी।
