लखनऊ [शोभित श्रीवास्तव]। उत्तर प्रदेश सरकार 25 करोड़ पौधारोपण अभियान में यूकेलिप्टस को हतोत्साहित करेगी। यही कारण है कि योगी सरकार ने इस बार यूकेलिप्टस का पौधा मुफ्त न देने का निर्णय लिया है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन विभाग को इसे सशुल्क देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सभी तरह के पौधे वन विभाग मुफ्त देगा। 

पहले पहल दलदली जमीन को सूखी भूमि में तब्दील करने के लिए यूकेलिप्टस के पौधे लगाए जाते थे। यह पेड़ जहां लगते हैं, वहां भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर जाता है। पर्यावरण के लिए मुसीबत का सबब बनने के बावजूद यूकेलिप्टस किसानों को इसलिए भाता है क्योंकि यह आर्थिक रूप से बहुत उपयोगी होता है। इमारती लकड़ी के अलावा फर्नीचर, प्लाईवुड, कागज, औषधि तेल व ईंधन के रूप में इसका प्रयोग होता है। बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसान फलदार पौधों के बजाय यूकेलिप्टस के पौधे लगाते हैं।

चूंकि यूकेलिप्टस का इस्तेमाल प्लाईवुड, कागज, औषधि तेल सहित कई इंडस्ट्री में हो रहा है इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध तो नहीं लगाया लेकिन पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसकी बागवानी हतोत्साहित करने का निर्णय जरूर लिया है। सरकार ने इस साल 25 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। इसमें किसान यूकेलिप्टस के पौधे अपने खेतों में न लगाएं इसलिए मुख्यमंत्री ने इसे शुल्क लेकर देने के निर्देश दिए हैं।

वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि यूकेलिप्टस से कई इंडस्ट्री जुड़ी हुईं हैं। उन्हें कच्चा माल प्रदेश के किसान ही उपलब्ध कराते हैं। पर्यावरण संरक्षण व इंडस्ट्री दोनों ही बहुत जरूरी हैं। दोनों में सामंजस्य बैठाकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इस बारे में अवगत कराया जाएगा। वन विभाग को भी नुकसान न हो इसका भी रास्ता निकाला जाएगा। 

सात रुपये में मिलेगा पौधा

वन विभाग की नर्सरी में यूकेलिप्टस का पौधा सात रुपये का मिलेगा, जबकि प्राइवेट नर्सरियों में यह पौधा 2.50 रुपये तक में मिल रहा है। दरअसल, वन विभाग के सामने दिक्कत यह है कि उसकी नर्सरी में एक साल के कम के पौधे सात रुपये में बेचने का शासनादेश है। यूकेलिप्टस भी इसी श्रेणी का पौधा है। इसमें दिक्कत यह है कि यह पौधा एक साल के भीतर ही लगाया जाता है। वैसे वन विभाग ने 25 करोड़ पौधारोपण के लिए जो पौधे उगाए हैं उनमें पांच करोड़ यूकेलिप्टस के हैं। वन विभाग को यह लग रहा था कि सभी पौधे मुफ्त वितरित होने हैं इसलिए उसने इतनी अधिक तादाद में यूकेलिप्टस के पौधे उगा डाले। अब पौधे अगर नहीं बिके तो यह बेकार हो जाएंगे और वन विभाग को करोड़ों रुपये की चपत भी लगेगी। 

Posted By: Umesh Tiwari

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