लखनऊ, जेएनएन। राजधानी की सेहत सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में तगड़ी डोज दी है। पीजीआइ से लेकर केजीएमयू और दूसरे प्रमुख अस्पतालों के लिए अपना खजाना खोलते हुए कई नई सेवाएं शुरू करने की घोषणा की है। इसी कड़ी में राजधानी में दो नए डाइबिटिक सेंटर खुलेंगे। जबकि सिविल अस्पताल के मरीजों को अब ट्रामा सेंटर की भी सुविधा मिलेगी। 

योगी सरकार ने अपना चौथा बजट पेश किया तो लखनऊ में स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी करने पर सबसे अधिक जोर दिया। यह इसलिए भी जरूरी था क्योंकि लखनऊ में पूरे प्रदेश और आसपास के कई राज्यों समेत नेपाल से भी बीमार इलाज कराने आते हैं। केजीएमयू को 919 करोड़, पीजीआइ को 820, कैंसर संस्थान को 187, लोहिया अस्पताल को 477, सिविल को 13 करोड़ रुपये विस्तार के लिए दिए हैं। 

सरकार का फोकस उन रोगों पर खासतौर से है, जो रोजमर्रा की बदलती जीवनशैली से आमजन को घेर रहे हैं। इन्हीं में एक बेहद कॉमन होती परेशानी डाइबिटीज है, जिससे निपटने के लिए लखनऊ के प्रमुख अस्पतालों को समुचित सुविधाओं से लैस करने का फैसला किया गया है। पीजीआइ में एडवांस डाइबिटिक एंड इंड्रोक्राइम साइसेंज सेंटर तथा केजीएमयू में एडवांस डाइबिटिक रेटिनो पैथी सेंटर खोलने की घोषणा हुई है। लोहिया में भी न्यूरो साइंस सेंटर खोलने को मंजूर मिल गई है। स्वास्थ्य के अलावा सरकार ने बसंतकुंज में 50 करोड़ से राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल बनाने की घोषणा की है। राजधानी को स्मार्ट सिटी के साथ सुरक्षित बनाने पर भी जोर है। महिलाओं के लिए शहर में सुरक्षा का वातावरण बने। वे बिना खौफ किसी भी वक्त यहां-वहां आ जा सकें, इसलिए निर्भया फंड के तहत प्रस्तावित सेफ सिटी प्रोजेक्ट को रफ्तार दी जाएगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से के 97 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

 

Posted By: Anurag Gupta

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