यूपी में गंगा किनारे बसे शहरों में स्वच्छता के साथ खुलेंगे रोजगार के अवसर, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार गंगा किनारे बसे शहरों को स्वच्छ, सुंदर और पर्यटन के लिहाज से आकर्षक बनाने की योजना पर ...और पढ़ें
-1780423025621_m.webp)
गंगा किनारे बसे शहरों में स्वच्छता के साथ खुलेंगे रोजगार के अवसर। AI जेनेरेटेड फोटो
HighLights
गंगा किनारे शहरों को स्वच्छ, सुंदर बनाने की योजना।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदा पानी रोकना।
पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने गंगा किनारे बसे शहरों को स्वच्छ, सुंदर और पर्यटन के लिहाज से आकर्षक बनाने की योजना पर काम शुरू करने जा रही है। इसके तहत गंगा में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे।
उपचारित जल का उपयोग पार्कों की सिंचाई और अन्य सार्वजनिक कार्यों में किया जाएगा। नगर विकास विभाग ने इस संबंध में संबंधित नगरीय निकायों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत गंगा तटीय शहरों को स्वच्छ और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। प्रदेश के कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, मीरजापुर, गाजीपुर, बलिया, बिजनौर, कन्नौज, गंगाघाट, गढ़मुक्तेश्वर, चुनार, अनूपशहर, हस्तिनापुर, नरोरा, बबराला और बिठूर समेत कई नगरीय निकाय इस योजना के दायरे में हैं।
सरकार का उद्देश्य गंगा तटों पर बेहतर साफ-सफाई, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित कर धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
योजना के तहत गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित नगरों में ठोस और तरल कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा। सीवेज और मल-कीचड़ के उपचार की व्यवस्था मजबूत की जाएगी ताकि बिना उपचारित गंदा पानी सीधे नदी में न पहुंचे।
एसटीपी के जरिए शुद्ध किया गया पानी ही नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे गंगा के जल प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि ‘अर्थ गंगा’ की अवधारणा के अनुरूप यह पहल नदी संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थायी आजीविका को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
