विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

वन भूमि हस्तांतरण नियमों पर मंथन: विकास संग पर्यावरण संतुलन प्राथमिकता; कम पेड़ कटान और ज्यादा हरियाली पर फोकस

Published: Sat, 21 Mar 2026 09:05 AM (IST)

लखनऊ में वन भूमि हस्तांतरण नियमों पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संतुलन और जनहित को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।

News Article Hero Image

HighLights

  1. वन भूमि हस्तांतरण नियमों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला।

  2. विकास परियोजनाओं संग पर्यावरण संतुलन पर विशेष जोर।

  3. कम पेड़ कटान, दोगुनी हरियाली पर मुख्य फोकस।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संतुलन और आमजन के हितों को सुरक्षित रखना अब सरकार की भी प्राथमिकता बनता जा रहा है। इसी दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े नियमों को और प्रभावी व जनहितकारी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

कैंपा (क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) के तहत आयोजित इस कार्यशाला में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम 1980 और नियम-2023 के प्रविधानों पर मंथन हुआ।

होटल हयात में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को विकास के साथ संतुलित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कैंपा की धनराशि वन्यजीव के क्षेत्र में किस प्रकार खर्च की जा सकती है इस पर भी मंथन होना चाहिए। वन्यजीव क्षेत्र केंद्रीय योजनाओं पर निर्भर है इस कारण वहां धनराशि की कमी है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव मनीष मित्तल ने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों में न्यूनतम भूमि की मांग और वैकल्पिक विकल्पों की गहन जांच के बाद ही अनुमति दी जाए। साथ ही, परियोजनाओं में कम से कम पेड़ों के कटान पर विशेष ध्यान दिया जाए।

कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि एक हेक्टेयर से कम वन भूमि के मामलों में दोगुणी अवनत भूमि पर पौधारोपण किया जाएगा, जबकि बड़ी परियोजनाओं में समतुल्य गैर-वन भूमि उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इससे न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा।

केंद्र सरकार में तैनात उप वन महानिरीक्षक विजया रात्रे ने वन भूमि हस्तांतरण प्रस्तावों में आने वाली सामान्य कमियों और उनके समाधान पर विस्तार से जानकारी दी। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक/नोडल अधिकारी ललित कुमार वर्मा ने प्रस्तुतीकरण के जरिए वन स्वीकृति से जुड़े प्रस्तावों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना बताया।

उन्होंने कहा कि वन स्वीकृति के कारण विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, साथ ही पर्यावरणीय मानकों का भी पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा जाए। कार्यशाला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक वर्किंग प्लान, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक एवं प्रभागीय वनाधिकारियों ने हिस्सा लिया।