यूपी : दिव्यांग छात्राओं के लिए ई-ट्राइसाइकिल की नई नियमावली जारी, पहले इन्हें मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल जाने वाली दिव्यांग छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल देने के लिए नई नियमावली जारी की है। इसके ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
दिव्यांग छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल देने के लिए नई नियमावली जारी हुई।
ऑनलाइन आवेदन और दिव्यांगता के घटते क्रम को मिलेगी वरीयता।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को पहले मिलेगा लाभ।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। शासन ने स्कूल जाने वाली व प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली दिव्यांग छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल देने की नई नियमावली जारी कर दी है। अब उन्हें दिव्यांगता के घटते हुए क्रम में लाभान्वित किया जाएगा।
आनलाइन आवेदन के जरिए पहले दावा करने वालों को वरीयता मिलेगी। मस्कुलर डिस्ट्राफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफीलिया से ग्रसित या ई-ट्राइसाइकिल पर बैठकर अपने हाथों से उपकरण का संचालन करने मे सक्षम दिव्यांग छात्रा को भी पात्र माना जाएगा। सीएमओ द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र मान्य होगा।
ई-ट्राइसाइकिल के पात्रों की उपरोक्त स्थिति छोड़कर जिला स्तर की तकनीकी समिति शारीरिक परीक्षण करेगी। समिति में सीएमओ, सहायक संभागीय अधिकारी एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शामिल रहेंगे। 16 या इसस ज्यादा उम्र के दिव्यांगजन पात्र होंगे।
पहले किन्हें दिया जाएगा लाभ?
पहले गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को संतृप्त किया जाएगा। उसके बाद दिव्यांगता के घटते हुए एवं आय के बढ़ते क्रम में लाभान्वित किया जाएगा। दिव्यांगजन को पांच वर्ष में एक बार ई-ट्राइसाइकिल दी जाएगी।
ऐसे लोग ही पात्र होंगे, जिन्हें सरकार एवं किसी जनप्रतिनिधि द्वारा साइकिल न मिली हो। पात्रों को अपने शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान से जारी प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा, जिसकी पुष्टि का जिम्मा जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी पर होगा।
वह ई-ट्राइसाइकिल वितरण संबंधित पंजिका रखेंगे, जिसमें आधार एवं यूनिक डिसएबिलिटी आइडेंटिटी कार्ड के साथ लाभान्वित होने की तिथि समेत पूरा विवरण होगा। प्रमुख सचिव राजेश सिंह ने बताया कि अगर किसी छात्रा का आवेदन निरस्त किया गया तो इसका कारण सहित विवरण देना होगा। अनुदान की अधिकतम राशि 65 हजार रुपये प्रति ट्राइसाइकिल होगी।
