यूपी में ई-रिक्शों के नए रजिस्ट्रेशन पर लग सकती है रोक, प्रदेश के सभी जिलों में सर्वे कराने की तैयारी कर रही सरकार
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शा के नए पंजीकरण पर रोक लगाने की तैयारी है। लखनऊ ...और पढ़ें

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HighLights
यूपी में ई-रिक्शा के नए पंजीकरण पर रोक लगेगी।
हाईकोर्ट ने भीड़भाड़ कम करने के लिए आदेश दिया।
जिलों में ई-रिक्शा की संख्या का सर्वे होगा।
धर्मेश अवस्थी, लखनऊ। राजधानी सहित जिलों में अब ई-रिक्शा का नया पंजीकरण रोकने को तेजी से कार्यवाही होगी। हर जिले में परिवहन, यातायात पुलिस व नगर निगम आदि की कमेटी बनाकर सर्वे कराने की योजना है। इसमें देखा जाएगा कि शहर में जरूरत के हिसाब से कितने ई-रिक्शा की आवश्यकता है और कितने पंजीकृत हो चुके हैं?
लखनऊ सहित अधिकांश जिलों में ई-रिक्शा का पंजीकरण अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर पंजीकरण रोका जाएगा।
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति एके चौधरी की पीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह बिसेन की दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि ई-रिक्शा का पंजीकरण निर्धारित सीमा से अधिक होने पर नया पंजीकरण रोकने की जरूरत है। राज्य सरकार इस पर चार सप्ताह में निर्णय ले।
साधनों की जरूरत के हिसाब से तय की जाएगी संख्या
ई-रिक्शा की परिवहन या यातायात विभाग ने शहर या जिलावार संख्या तय नहीं किया है। ऐसे में सबसे पहले सर्वे करके इनकी संख्या शहर व जिलों में आवागमन के साधनों की जरूरत के हिसाब से तय की जाएगी।
सुनवाई के दौरान कहा गया कि मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया था, केंद्र ने राज्य सरकार के पत्र का उत्तर दिया, लेकिन राज्य सरकार को पंजीकरण रोकने या शहरवार संख्या निर्धारित करने पर कुछ नहीं कहा। साथ ही मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 39 के तहत पंजीकरण की अनिवार्य आवश्यकता को समाप्त नहीं किया है।
पीठ ने कहा ई-रिक्शा से संबंधित मुद्दे पर इस न्यायालय के समक्ष कई अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया और सभी पक्ष इस बात पर एकमत हैं कि लखनऊ शहर की सड़कों पर लगभग एक लाख 33 हजार ई-रिक्शा चलने से जगह-जगह जाम लग रहा है और यह शहर में भीड़ का एक प्रमुख कारण भी है। कोर्ट ने कहा इसलिए रोक-थाम लगाना आवश्यक है ताकि ई-रिक्शा की संख्या तय सीमा से अधिक न बढ़े।
कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया कि लखनऊ शहर या प्रदेश के किसी अन्य शहर में चल रहे ई-रिक्शा की संख्या आवश्यकता से कहीं अधिक है तो वे मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 39 के तहत आदेश पारित कर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दे सकते हैं कि जब तक इस निर्णय की समीक्षा न हो जाए।
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तब तक ई-रिक्शा के किसी भी नए पंजीकरण को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया, उन्हें कोर्ट का आदेश नहीं मिला है, उसे देखने के बाद जल्द अगला कदम उठाएंगे।
मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 39 क्या है
कोई भी व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई मोटर वाहन बिना पंजीकरण नहीं चलाएगा, वाहन का स्वामी किसी अन्य से वाहन चलवाने की अनुमति नहीं देगा जब तक कि वाहन इस अधिनियम के अनुसार पंजीकृत न हो।
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