यूपी के 19 जिलों के 14.23 लाख उपभोक्ताओं नहीं जमा करते बिजली का बिल, 8148 करोड़ बकाया
उत्तर प्रदेश के मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के 19 जिलों में 14.23 लाख बिजली उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने कनेक्शन ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
मध्यांचल के 19 जिलों में 14.23 लाख उपभोक्ता बकायादार।
इन उपभोक्ताओं पर 8,148 करोड़ रुपये से अधिक बकाया।
राजस्व वसूली के लिए विभाग कर रहा लगातार प्रयास।
अंशू दीक्षित, लखनऊ। जानकर हैरानी होगी कि 19 जिले के 14.23 लाख बिजली उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद से एक रुपये जमा नहीं किया। इन्हें बिजली विभाग अंग्रेजी में नेवर पेड कंज्यूमर कहता है। खासबात है कि सभी 19 जिले मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं का पूरा ब्योरा बिजली विभाग के रिकार्ड में है।
समय-समय पर इनके यहां राजस्व वसूली को टीम भेजी जाती है। एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का लाभ लेने के लिए कहा जाता है। इनमें कुछ उपभोक्ता ओटीएस का फायदा उठाकर सामान्य उपभोक्ताओं की तरह बिल देने लगे हैं लेकिन अभी भी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड क्षेत्र में एक करोड़ पांच लाख उपभोक्ताओं में 14.23 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जो बिल ही नहीं जमा करते हैं इन बकाएदारों पर 8,148 करोड़ से अधिक का बकाया है। अगर यह धनराशि एक साथ मिल जाए तो लखनऊ, बरेली व अयोध्या जैसे जिलों की शहरी बिजली व्यवस्था नो ट्रिपिंग वाली हो जाएगी, जिसके लिए प्रदेश सरकार 11 सालों से प्रयास कर रही है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के 19 जिलों में बरेली में एक लाख बारह हजार उपभोक्ता है, जिन्होंने बिल ही नहीं दिया। गोंडा इससे भी आगे हैं जहां संख्या 1.46 लाख उपभोक्ता की है।
इसके बाद लखीमपुर, सीतापुर, सुलतानपुर, हरदोई जैसे जिले हैं, जो मध्यांचल के राजस्व को आर्थिक चोट पहुंच रहे हैं। यहां तैनात मुख्य अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता ऐसे उपभोक्ताओं से राजस्व वसूली करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। हां लखनऊ में यह संख्या जरूर कम हुई है। राजधानी में कुल उपभोक्ता 15.5 लाख है, इनमें पहले नेवर पेड कंज्यूमर की संख्या बीस हजार थी, फिर कम हुई पंद्रह हजार पर आई और वर्तमान में यह संख्या सिर्फ 6,919 उपभोक्ताओं की बची है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक वाणिज्य रजत जुनेजा कहते हैं कि जो भी नेवर पेड़ कंज्यूमर हैं, इनसे लगातार राजस्व वसूली के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पूरा प्रयास है कि आगामी कुछ माह में यह आंकड़ा न के बराबर बचे।
मध्यांचल के जिलों नेवर पेड कंज्यूमर की संख्या 
