यूपी चुनाव से पहले युवाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा, प्रदेश की 11350 पंचायतों में जल्द बनेंगी डिजिटल लाइब्रेरी
उत्तर प्रदेश की 11350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है, मुख्यमंत्री कार्यालय ने संबंधित फाइल वापस कर दी है।

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HighLights
डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना पर विवाद समाप्त हुआ।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने फाइल वापस कर निर्णय लेने को कहा।
गुरुवार को कार्य शुरू करने पर अहम बैठक होगी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश की 11350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना को लेकर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर और विभागीय अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इससे संबंधित फाइल वापस कर दी है। मंत्री से कहा गया है कि पुस्तकालयों का कार्य शुरू कराने पर निर्णय जल्द लें।
अब गुरुवार को मंत्री और विभाग के प्रमुख सचिव इस मुद्दे पर बैठक कर काम शुरू कराने का रास्ता निकालेंगे। बैठक में पुस्तकालयों की स्थापना के लिए कंप्यूटर, फर्नीचर और प्रतियोगी पुस्तकों की खरीद किस संस्था के माध्यम से की जाएगी, इस पर चर्चा होगी।
मंत्री राजभर ने क्या बताया?
मंत्री राजभर ने बताया है कि गुरुवार की बैठक में कार्यदायी संस्था के चयन पर निर्णय लिया जाएगा। आईटी और इलेक्ट्रानिक क्षेत्र में कार्यरत राज्य सरकार की संस्थाओं से बातचीत की जा रही है। पुस्तकालयों की स्थापना का कार्य विधान सभा चुनाव से पहले पूरा किया जाएगा। प्रमुख सचिव बने रविंद्र ने भी बैठक में निर्णय ले लिए जाने की बात कही है।
गौरतलब है कि 454 करोड़ रुपये की लागत से 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने पूर्व की व्यवस्था के तहत फर्नीचर और प्रतियोगी पुस्तकों की खरीद जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति द्वारा और कंप्यूटर की खरीद उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन (यूपीडेस्को) से कराने का निर्णय लिया था।
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इस निर्णय से असहमति जताते हुए मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुस्तकालयों की स्थापना में भ्रष्टाचार की शिकायत कर दी थी, जिसके कुछ दिनों बाद ही अनिल कुमार का स्थानांतरण खाद्य एवं रसद विभाग में कर दिया गया।
