'प्रधानाचार्यों की समस्याओं का हर हाल में हो समाधान', डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
प्रधानाचार्य परिषद ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सामने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की वित्तीय और सेवा संबंधी समस्याओं को रखा।

यूपी प्रधानाचार्य परिषद के वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य।
HighLights
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की वित्तीय कठिनाइयां और पुरानी शुल्क दरें।
प्रधानाचार्यों-शिक्षकों की सेवा सुरक्षा व वेतन संबंधी विसंगतियों का मुद्दा।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं। विद्यालयों की वित्तीय कठिनाइयां, शुल्क की पुरानी दरें, बढ़ती महंगाई, बिजली व्यय, आरटीई के कारण छात्र निधि पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार से दिक्कतें हो रही हैं।
प्रधानाचार्यों- शिक्षकों की सेवा सुरक्षा व वेतन संबंधी विसंगतियां सीधे तौर पर विद्यालयों के सुचारु संचालन व शैक्षिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं, जिनका समाधान सरकार से अपेक्षित है। इनका समाधान हर हाल में होना ही चाहिए। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के पदाधिकारियों ने शनिवार को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विस्तृत चर्चा की।
कैसरबाग के गांधी भवन सभागार में आयोजित प्रांतीय शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी एवं प्रधानाचार्य सम्मेलन में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की समस्याओं एवं मांगों को सुना। साथ ही शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में प्रधानाचार्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रताप सिंह बघेल ने भी शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी व्यवस्था एवं विभागीय स्तर पर शिक्षा के उन्नयन से संबंधित विषयों पर विचार रखे।
परिषद के प्रदेशीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. हरेंद्र कुमार राय ने कहा कि बदलते शैक्षिक परिवेश में प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारियां निरंतर बढ़ रही हैं, जबकि उनके सामने अनेक सेवा संबंधी, वित्तीय एवं प्रशासनिक कठिनाइयां भी उत्पन्न हो रही हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने की। एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश सिंह, श्रीचंद शर्मा, प्रदेशीय मुख्य संरक्षक देव कृष्ण शर्मा, परिषद के संरक्षक डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेशीय महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर ने भी विचार साझा किए।
