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यूपी में 'गोबर' से बदलेगी गांवों की किस्मत, योगी सरकार 7500 गोशालाओं को बनाएगी खाद प्रोडक्शन सेंटर

Published: Wed, 13 May 2026 07:19 PM (IST)

योगी सरकार उत्तर प्रदेश के 7500 गो-आश्रय स्थलों पर गोबर से जैविक खाद बनाएगी, जिससे गो-संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ...और पढ़ें

यूपी में गोबर से बदलेगी गांवों की किस्मत

यूपी में गोबर से बदलेगी गांवों की किस्मत

HighLights

  1. 7500 गो-आश्रय स्थलों पर जैविक खाद उत्पादन।

  2. किसानों को सब्सिडी पर खाद, लागत में कमी।

  3. ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों स्वरोजगार के अवसर।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के गोपालकों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए खुशहाली का नया द्वार खोल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, अब प्रदेश के लगभग 7500 गो-आश्रय स्थलों पर गोबर से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस योजना का दोहरा लाभ होगा—एक ओर गो-वंश का प्रभावी संरक्षण होगा, तो दूसरी ओर किसानों को सब्सिडी पर जैविक खाद उपलब्ध कराकर उनकी लागत कम की जाएगी। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक दूरगामी कदम माना जा रहा है।

रोजगार और ट्रेनिंग पर फोकस 

योजना के तहत तैयार खाद को 50 किलो के सुविधाजनक पैकेट में पैक किया जाएगा, जिसे कृषि विश्वविद्यालयों और विज्ञान केंद्रों की टेस्टिंग के बाद बाजार में उतारा जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और पशुपालकों के लिए स्वरोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। सरकार बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षकों की एक फौज तैयार करेगी, जो गोबर से खाद तैयार करने की तकनीक में स्वयं सहायता समूहों की मदद करेंगे।

आर्थिक संसाधन के रूप में गाय का गोबर 

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, राज्य में पहली बार गाय के गोबर को एक सशक्त आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि डीएपी और यूरिया पर निर्भरता कम कर किसानों को प्राकृतिक खेती का एक बेहतर विकल्प दिया जाए। इसके लिए सरकार ने गो-संरक्षण के लिए ₹2000 करोड़ और वृहद गो-संरक्षण केंद्रों के लिए 100 करोड़ की अलग से व्यवस्था की है।

सुरक्षा से समृद्धि का सफर 

वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो-तस्करी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन योगी सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर लगाम लगाकर उत्तर प्रदेश को गो-संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। अब मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के जरिए सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। सरकार ₹50 प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी (DBT) के जरिए सीधे पशुपालकों के बैंक खाते में पैसा भेज रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।

प्राकृतिक खेती और आय का नया मॉडल 

वर्तमान में प्रदेश के गो-आश्रय स्थलों में 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। एक गाय से मिलने वाला लगभग 10 किलो गोबर और 5 लीटर गोमूत्र अब खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का मुख्य आधार बनेगा। सरकार की रणनीति है कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गो-संरक्षण केंद्र हो, जो न केवल खाद बनाए बल्कि प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य करे। इससे खेती की लागत कम होगी और 'गोबर से आमदनी' का नया मॉडल ग्रामीण यूपी की तस्वीर बदल देगा।