लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के प्रयास में जुटी कांग्रेस ने अब सख्त फैसले लेने की भी शुरुआत कर दी है। पूरी जांच पड़ताल के बाद भी पांच जिलाध्यक्ष ऐसे पाए गए, जो काम में कमजोर साबित हुए या विवाद में आ गए। इनकी जगह नए अध्यक्षों को कमान सौंपी है। वहीं, तीन शहर अध्यक्ष बदले हैं और भाजपा की तरह बड़े जिले या शहर में दो अध्यक्ष को जिम्मेदारी देने जैसी पहल भी पार्टी ने की है।

अब आई कांग्रेस के 13 नए जिला और शहर अध्यक्षों की सूची के साथ ही एक वर्ष से चल रहा है जिला-शहर अध्यक्ष नियुक्त करने का सिलसिला पूरा हो चुका है। सभी 128 संगठनात्मक इकाइयों के अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। खास बात है कि इस आखिरी सूची के जरिए राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका वाड्रा ने आगे के लिए भी कड़ा संदेश दे दिया है।

इन दिनों यूपी कांग्रेस में संगठन सृजन का अभियान चल रहा है। नए कार्यकर्ता तैयार करने के साथ ही जिला और शहर अध्यक्षों के कामकाज का आकलन भी चल रहा है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही भदोही, अंबेडकरनगर और मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष हटाकर नए बना दिए हैं, जबकि आगरा की मनोज दीक्षित को टोरेंट पावर से वसूली का वीडियो वायरल होने और गोंडा के पंकज चौधरी को भाजपा का मंच साझा करने पर हटाया गया है।

इसी तरह देवरिया, बुलंदशहर और कन्नौज के शहर अध्यक्ष बदले हैं। उधर, कानपुर नगर में अब तक नए शहर अध्यक्ष की नियुक्ति अटकी पड़ी थी। इसी बीच बड़े जिले और शहरों में दो अध्यक्ष बनाने की नीति बनी। उसके तहत वहां और लखनऊ में उत्तर-दक्षिण इकाई बनाकर अलग-अलग अध्यक्षों को जिम्मा सौंपा गया है। इसी तरह प्रयागराज में गंगापार को अलग जिला इकाई बनाकर नए अध्यक्ष को कमान सौंपी है।

इन्हें मिली नई जिम्मेदारी

जिलाध्यक्ष

  • सुरेश यादव : गंगापार, प्रयागराज
  • मबूद खान : भदोही
  • अमित वर्मा : अंबेडकरनगर
  • वीरेंद्र पटेल : गोंडा
  • राघवेंद्र सिंह मीनू : आगरा
  • सुबोध शर्मा : मुजफ्फरनगर

शहर अध्यक्ष

  • डॉ. शैलेंद्र दीक्षित : कानपुर दक्षिण
  • नौशाद मंसूरी : कानपुर उत्तर
  • कुंवर तौकीर अली : बुलंदशहर
  • अजय दुबे : मैनपुरी
  • अजय कुमार श्रीवास्तव : लखनऊ उत्तर
  • आनंद श्रीवास्तव : देवरिया
  • मीर हारून : कन्नौज