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यूपी कांग्रेस की कमान संभालते ही आराधना मिश्रा ‘मोना’ की दो टूक, बताया कब फाइनल होगा सपा से सीट शेयरिंग का फॉर्मूला

Published: Sat, 03 Oct 2026 10:30 PM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 10:34 PM (IST)

यूपी कांग्रेस की बागडोर संभालने वाली आराधना मिश्रा 'मोना' ने सपा से गठबंधन और सीट बंटवारे पर कोई संशय न होने की बात कही है।

यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’।

यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’।

HighLights

  1. सपा से गठबंधन और सीट बंटवारे पर कोई संशय नहीं।

  2. इंडिया गठबंधन का निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही लेगा।

  3. नवरात्रि तक सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ होगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर चल रही कश्मकश के बीच प्रदेश कांग्रेस की बागडोर संभालने वाली 52 वर्षीय आराधना मिश्रा ‘मोना’ का स्पष्ट तौर पर कहना है कि न सपा से गठबंधन को लेकर और न ही सीटों के निर्णय पर कोई संशय है। कहीं भी कोई टकराव की स्थिति नहीं है कि कितनी सीटों पर कौन पार्टी लड़ेगी?

शुक्रवार रात अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा के बाद से लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित बंगले पर बधाई देने वालों के न खत्म होने वाले सिलसिले के बीच मोना ने दैनिक जागरण के उप राजनीतिक संपादक (उत्तर प्रदेश) अजय जायसवाल से बातचीत में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर बने इंडिया गठबंधन का निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही लेगा। राहुल गांधी और अखिलेश यादव पूरी तरह से एक-दूसरे के संपर्क में है। सीटों को लेकर नवरात्रि में ही तस्वीर साफ हो जाएगी।

मोना दावे के साथ कहती हैं कि लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी इंडिया गठबंधन सत्ताधारी भाजपा को बड़ा झटका देगा और अबकी सरकार भी बनाएगा।

प्रस्तुत है मोना से बातचीत के प्रमुख अंश-

वर्ष 1989 से सूबे की सत्ता से बाहर कांग्रेस के सामने क्या चुनौतियां मानती हैं?

जिस तरह से राहुल गांधी जी संविधान-लोकतंत्र को बचाने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, उसी तरह हर कार्यकर्ता को भी सड़कों पर निकलना पड़ेगा। जब तक कार्यकर्ता के मन में वर्ष 2027 में सरकार बनाने का विश्वास नहीं आएगा, उनके अंदर की ताकत बाहर नहीं आएगी। यही विश्वास जगाना है।

क्या आपको अध्यक्ष बनाने में पार्टी ने देर कर दी?

समय कम जरूर है, लेकिन उचित समय यही है। कम समय में पूरी टीम के साथ ज्यादा काम कर बेहतर नतीजे देंगे। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना है। संगठन व काडर वही होगा, लेकिन परिणाम बदले होंगे।

सपा से गठबंधन और सीट बंटवारे पर कश्मकश देखने-सुनने को मिल रही है...

गठबंधन को लेकर कहीं कोई संशय नहीं है। चूंकि इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बना है, इसलिए उस पर निर्णय भी राष्ट्रीय नेतृत्व ही लेगा, लेकिन उसमें प्रदेश के कार्यकताओं की भावनाओं का सम्मान जरूर रखा जाएगा। राहुल जी और अखिलेश जी की रोज बातचीत हो रही है। इसी माह नवरात्रि में सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी।

कितनी सीटों की उम्मीद है? चर्चा तो 150 सीटों की है

कल ही मुझे जिम्मेदारी मिली है, अभी मेरे पास ऐसा कोई इनपुट नहीं है, इसलिए ऐसी कोई बात नहीं कहूंगी जिसकी पुष्टि मैं नहीं कर सकती। चुनाव किसे कहां से लड़ाना है इसे पूरी गंभीरता के साथ तय किया जाएगा।

भाजपा सरकार की उपलब्धियों के बारे में आप क्या कहेंगी?

इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि देश का बिखराव है। सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर सरकार बनाते रहे। उपलब्धियों में चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, वोट चोरी, खाद चोरी, महिलाओं असुरक्षा, भ्रष्टाचार, ध्वस्त कानून-व्यवस्था ही हैं। इन्हीं मुद्दों पर हम 2027 का चुनाव लड़ेंगे।

आपके अध्यक्ष बनने से क्या महिलाओं को तव्वजो मिलेगी?

कांग्रेस की विचारधारा महिला सशक्तिकरण की थी, है और रहेगी। वर्ष 2022 में प्रियंका जी का ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा केवल नारा नहीं था, बल्कि हमने 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देकर उनकी राजनीतिक भागीदारी तय की और आगे भी ध्यान रखेंगे। भाजपा व उसके सहयोगी बताएं कि क्या विधानसभा चुनाव में वह महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देंगे?

अब सबको चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी के बीच क्या खुद भी चुनाव मैदान में उतरेंगी?

बिल्कुल रामपुर खास सीट से ही फिर चुनाव लडूंगी। पिता प्रमोद तिवारी (नौ बार के विधायक व वर्तमान में राज्यसभा सदस्य) से लेकर हमने बहुत चुनाव लड़े हैं और जीते भी। मुझे गर्व है कि हमारी चौथी पीढ़ी कांग्रेस में है। मैं अपनी आने वाली पीढ़ियों से भी कहूंगी कि कांग्रेस की सेवा करे और देश की सेवा करे।

प्रदेश में कांग्रेस की दुर्दशा के लिए गलती संगठन की है या रणनीति की?

किसी की गलती नहीं है। दो-चार जिलों तक प्रभाव वाले जाति-धर्म आधारित क्षेत्रीय दल बने तो कहीं न कहीं कांग्रेस का मूल वोट ही बंटा। इसके डैमेज कंट्रोल में हमने सक्रियता नहीं दिखाई, लेकिन अब जाति-धर्म की राजनीति से प्रदेश के लोग ऊब चुके हैं।

कांग्रेस क्या सपा पर निर्भर होती जा रही है?

ऐसा बिल्कुल नहीं हैं। कांग्रेस किसी पर निर्भर नहीं। गठबंधन की राजनीति आपसी सामंजस्य से होती है। सामंजस्य बेहतर था तभी 24 में अच्छे परिणाम आए और मेरी जिम्मेदारी है कि वही सामंजस्य-समन्वय आगे भी बेहतर रहे। वर्ष 2019 से 2022 तक प्रियंका गांधी जी ने बहुत काम किया। उसका अपेक्षित परिणाम वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में नहीं आया, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में जरूर देखने को मिला

। 400 पार की बात करने वाली भाजपा, इंडिया गठबंधन के कारण प्रदेश में घटकर आधे पर रह गई। हमारे काडर ने पूरी ताकत व ईमानदारी से अपने के साथ ही सपा प्रत्याशियों को भी जिताया। प्रियंका जी के काम से संगठन मजबूत हुआ है। पिछले ढाई वर्ष में काफी काम हुआ है, जिसका परिणाम वर्ष 2027 के चुनाव में देखने को मिलेगा।

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