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जनगणना 2027 को लेकर आया बड़ा अपडेट, घर-घर पहुंचेंगे गणनाकर्मी, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल

Published: Sat, 02 May 2026 06:18 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो रही है, जिसमें पहली बार डिजिटल तरीके से स्वगणना का विकल्प मिलेगा।

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में 15 साल बाद फिर से जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। यह कई मायनों में खास होगी। इसमें पहली बार डिजिटल तरीके से डाटा जुटाया जाएगा। इसमें आप सिर्फ गिने नहीं जाएंगे, बल्कि खुद अपनी जानकारी भी दर्ज कर सकेंगे।

पहली बार सात मई से 21 मई तक लोगों को स्वगणना के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान नागरिक अपने मोबाइल या लैपटाप के जरिये पोर्टल पर जाकर सभी सवालों के जवाब भर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से गणनाकर्मी घर-घर पहुंचकर सत्यापन और मकान सूचीकरण का काम करेंगे।

पहले चरण में गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों की स्थिति(हाउस लिस्टिंग), परिवार को उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से एकत्रित करेंगे। इस चरण में न तो व्यक्तिगत गणना होगी और न ही जातिगत गणना की जाएगी। दूसरे चरण में, जो अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित है, व्यक्तिगत और जातिगत गणना की जाएगी।

गौरतलब है कि प्रदेश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और अब लंबे अंतराल के बाद यह प्रक्रिया फिर शुरू हो रही है। जनगणना कार्य निदेशालय उत्तर प्रदेश की निदेशक शीतल वर्मा ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि जो व्यक्ति जहां रहता है उसकी गणना वहीं होगी।

नियमानुसार, जिस व्यक्ति ने किसी स्थान पर कम से कम 180 दिन निवास किया है, उसकी गणना उसी स्थान पर होगी।जनगणना के लिए प्रदेश में करीब 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

लोगों से अपील की कि सभी नागरिक सही और सटीक जानकारी दें। साथ ही स्पष्ट किया कि जनगणना से जुड़ा डाटा पूरी तरह गोपनीय होता है और इसे किसी भी स्थिति में साझा नहीं किया जाता। गलत जानकारी देने पर सजा का भी प्रविधान है।

मोबाइल से ऐसे करें स्वगणना

  • सबसे पहले मोबाइल या लैपटाप से पोर्टल http://se.census.gov.in पर जाएं।
  • प्रदेश का चयन करें और कैप्चा कोड भरें।
  • परिवार पंजीकरण के लिए परिवार के मुखिया का नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आइडी (यदि हो) दर्ज करें।
  • ध्यान रहे, एक बार दर्ज किया गया मुखिया का नाम बदला नहीं जा सकेगा।
  • एक मोबाइल नंबर केवल एक ही परिवार के लिए उपयोग होगा।
  • ओटीपी सत्यापन के बाद भाषा चुनें और जिला, पिनकोड, गांव/नगर की जानकारी भरें।
  • मानचित्र पर लाल मार्कर से अपने घर का सटीक स्थान चिन्हित करें।
  • इसके बाद मकान सूचीकरण और प्रश्नावली भरें।
  • सभी जानकारी भरने के बाद प्री-रिव्यू (पूर्वावलोकन) कर सकते हैं।
  • संतुष्ट होने पर ‘सबमिट’ करें, इसके बाद बदलाव संभव नहीं होगा।
  • सबमिट करने पर 11 अंकों की स्वगणना पहचान संख्या (एच से शुरू) मिलेगी।

गणनाकर्मी आने पर क्या करें?

यदि आपने स्वगणना कर ली है, तो गणनाकर्मी को अपनी पहचान संख्या दिखाएं। वे इसका मिलान कर आपकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। अगर जानकारी में संशोधन चाहिए, तो गणनाकर्मी से दोबारा गणना कराई जा सकती है। यदि स्वगणना सही है, तो सिर्फ सत्यापन के बाद पहले चरण की जनगणना पूरी मानी जाएगी।

गणनाकर्मी कैसे करेंगे काम?

एक गणनाकर्मी को लगभग 800 लोगों या 180–200 मकानों का डाटा जुटाना होगा। अपने मोबाइल के जरिये एचएलओ एप से जानकारी दर्ज होगी। अधिकतर गणनाकर्मी शिक्षक हैं। गर्मी को देखते हुए सुबह और शाम में गणना का कार्य किया जा सकेगा। हर गणनाकर्मी को 25 हजार रुपये मानदेय दिए जाएंगे। हर छह गणनाकर्मियों पर एक पर्यवेक्षक रखा गया है।

पहले चरण में पूछे जाएंगे 33 सवाल

पहले चरण में मकानों और सुविधाओं से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे, जैसे मकान नंबर, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), मकान का उपयोग और स्थिति, परिवार और सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग (एससी/एसटी/अन्य),
पानी, बिजली, शौचालय, रसोई की सुविधा, गैस कनेक्शन (एलपीजी/पीएनजी), मोबाइल, इंटरनेट, टीवी, कंप्यूटर, वाहन (साइकिल, बाइक, कार), घर में उपयोग होने वाला मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर।

रसोई से तय होगा जनगणना परिवार?

सामान्यत: एक साथ रहने वाले और एक रसोई से भोजन करने वाले लोगों का समूह परिवार माना जाता है। अगर एक घर में दो जगह अलग-अलग खाना बनता है, तो उसे दो जनगणना परिवार गिना जाएगा।

वहीं एक भवन या उसका हिस्सा जिसका सड़क, आंगन, सीढ़ी से अलग मुख्य प्रवेश द्वार हो से जनगणना मकान माना जाएगा। शहरी क्षेत्र में जीर्ण-शीर्ण, भीड़भाड़, वेंटिलेशन, जल निकासी की कमी वाले आवासीय क्षेत्र स्लम श्रेणी में दर्ज होंगे।

देश की जनगणना का इतिहास

  • देश की पहली जनगणना: 1872
  • पूरे देश में एक साथ पहली जनगणना: 1881
  • पहली जातिगत जनगणना: 1931
  • वर्ष 2027 की जनगणना: देश की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना।

कब और कैसे होगी जनगणना?

  • दूसरे चरण में बेघर लोगों की गिनती की जाएगी।
  • फरवरी 2027 में जातिगत और व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाएगी।
  • जनसंख्या की गणना एक मार्च 2027 की रात 12 बजे तक के आधार पर होगी।
  • इसके आंकड़े मई 2027 में जारी किए जाएंगे।

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