जनगणना 2027: हर दरवाजे पर नंबर, ‘माइक्रो कोडिंग’ से बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
जनगणना 2027 पूरी तरह हाईटेक होगी, जिसमें हर घर, दरवाजे और रसोई का डिजिटल रिकॉर्ड 'माइक्रो कोडिंग' के जरिए तैयार ...और पढ़ें
-1777701326269_m.webp)
AI Image
HighLights
हर घर और परिवार का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा।
परिवार की पहचान 'एक रसोई' के आधार पर होगी।
बेघर लोग भी जनगणना में सूचीबद्ध किए जाएंगे।
जागरण संवाददाता, नवानगर (बलिया)। जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह हाईटेक और सटीक व्यवस्था के साथ आयोजित की जाएगी। नई प्रणाली के तहत हर घर, हर दरवाजे और हर रसोई की अलग पहचान तय की जाएगी। इससे एक ही भवन में रहने वाले अलग-अलग परिवारों की भी स्पष्ट पहचान हो सकेगी।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जनगणना कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि इस बार केवल मकानों की गिनती नहीं, बल्कि प्रत्येक इकाई का डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए तीन स्तर भवन, जनगणना मकान और परिवार पर कोडिंग की जाएगी।
सबसे पहले प्रत्येक स्वतंत्र भवन को क्रमवार नंबर (1, 2, 3…) दिया जाएगा। इसके बाद उसी भवन में स्थित प्रत्येक जनगणना मकान को चार अंकों के विशेष कोड (0001, 0002…) से दर्ज किया जाएगा। एक ही भवन में दुकान, गोदाम या आवास होने पर सभी को अलग-अलग इकाई मानकर अलग कोड दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें- पूर्णिया में आंधी-बारिश के बीच ठनका गिरने से वृद्ध की मौत, चार पुत्रों का परिवार पीछे छोड़ गए नागेश्वर शर्मा
'एक रसोई' से तय होगी परिवार की पहचान
इस बार परिवार की पहचान का आधार 'एक रसोई' को बनाया गया है। यानी जो लोग एक ही चूल्हे पर भोजन करते हैं, उन्हें एक परिवार माना जाएगा। यदि एक ही मकान में अलग-अलग रसोई हैं, तो उन्हें अलग परिवार मानकर 001, 002 जैसे अलग कोड दिए जाएंगे।
संस्थागत परिवार को मिलेगा 999 कोड
जनगणना में सामान्य और संस्थागत परिवारों की अलग पहचान होगी। हास्टल, अस्पताल, आश्रम, वृद्धाश्रम या जेल जैसे स्थानों पर रहने वालों को “999” कोड के तहत दर्ज किया जाएगा। नई व्यवस्था में खाली मकान, बंद दुकानें और गैर-आवासीय इकाइयां भी दर्ज की जाएंगी। वहीं, सड़क किनारे या खुले में रहने वाले बेघर लोगों को भी सूचीबद्ध कर अलग से चिह्नित किया जाएगा।
