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जनगणना में देनी होगा आधार नंबर, बैंक खातों और मोबाइल फोन की जानकारी, कास्ट की डिटेल्स भी होंगी दर्ज

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:55 AM (IST)Updated: Fri, 23 Oct 2026 07:03 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक जनगणना 2027 का दूसरा चरण चलेगा, जिसमें लोगों से आधार, बैंक ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. जनगणना 2027 का दूसरा चरण 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक

  2. आधार, बैंक, मोबाइल और जातीय विवरण पहली बार दर्ज होगा

  3. 4 जनवरी की रात बेघर लोगों की भी गिनती होगी

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आपके घर में कितने लोग रहते हैं, परिवार में कितने सदस्य हैं और आपके पास आधार, बैंक खाता, मोबाइल फोन, वोटर आइडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं? जनगणना-2027 के दूसरे चरण में इन समेत करीब 40 सवालों के जवाब देने होंगे। प्रदेश में एक दिसंबर से चार जनवरी तक घर-घर पहुंचने वाले जनगणना कर्मी मकान, परिवार और प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे। चार जनवरी की रात खुले में सोने वालों की गिनती कर बेघर लोगों का आंकड़ा भी तैयार किया जाएगा।

पांच जनवरी 2027 को संदर्भ तिथि मानकर जनसंख्या की स्थिति दर्ज होगी। जनगणना निदेशक व मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया कि लोगों को केवल जरूरी जानकारी देनी होगी, किसी तरह के कागजात या दस्तावेज की प्रति जमा नहीं करनी होगी।जनगणना में आजादी के बाद पहली बार जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। प्रदेश में इस बड़े अभियान के लिए 5.62 लाख से अधिक कार्मिक लगाए जाएंगे। सभी 75 जिलों को 1195 चार्ज में बांटा गया है।

इनमें 350 ग्रामीण और 845 शहरी चार्ज हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सभी चार्ज तहसील स्तर पर बनाए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में 545 नगर पंचायत, 200 नगर पालिका परिषद, 13 कैंटोनमेंट बोर्ड, आठ औद्योगिक टाउनशिप (आइटीएस) और 79 नगर निगम जोन शामिल हैं। इस तरह ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में ढाई गुने से अधिक चार्ज बनाए गए हैं।

अलग से दर्ज नहीं की जाएगी आबादी

जिलाधिकारी जिले के प्रधान जनगणना अधिकारी होंगे। मुख्य विकास अधिकारी को पहली बार अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। नगर निगमों में नगर आयुक्त भी जनगणना की व्यवस्था में अहम भूमिका निभाएंगे। रक्षा क्षेत्रों में सेना के कार्मिकों को प्रशिक्षित कर गणना का काम कराया जाएगा, हालांकि इन क्षेत्रों की आबादी अलग से दर्ज नहीं की जाएगी। पहले चरण में ड्यूटी कर चुके निजी स्कूलों के शिक्षकों को दूसरे चरण में भी लगाया जाएगा।

जनगणना के लिए प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज करने की व्यवस्था के तहत पिछले वर्ष 31 जनवरी से सीमाओं में बदलाव नहीं किया जा सकता है। हालांकि, क्षेत्रों के नाम बदलने की अनुमति होगी। प्रदेश में करीब 7290 गैर-आबाद क्षेत्र भी जनगणना के दायरे में रखे जाएंगे। बेघर लोगों की सही संख्या जुटाने के लिए चार जनवरी की रात विशेष अभियान चलाया जाएगा।

इस दौरान खुले में सोते मिलने वाले लोगों को बेघर के रूप में दर्ज किया जाएगा। फ्लाईओवर के नीचे, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और ऐसे ही अन्य स्थानों पर रात बिताने वाले लोग भी इसमें शामिल होंगे। किसी मकान में दो रसोई होने का मतलब यह नहीं होगा कि वहां दो अलग-अलग हाउसहोल्ड हैं, बल्कि दो परिवार माने जाएंगे। जनगणना में इसके लिए परिवार और रहने की वास्तविक स्थिति को आधार बनाया जाएगा।

विदेश में रहने वालों की गणना तय नियमों से

विदेश में रहने वाले भारतीयों की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। लंबे समय से भारत में नहीं रहने वाले लोगों को यहां की जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा। जनगणना से जुड़े सवालों या अन्य जानकारी के लिए 1855 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।