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यूपी कैबिनेट ने 'खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025' को दी हरी झंडी, भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी से मिलेगी छूट

Published: Wed, 16 Sep 2026 03:05 AM (IST)

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 'खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025' को मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य में खिलौना उद्योग को बढ़ावा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी।

  2. घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर सब्सिडी का प्रावधान।

  3. बिजली ड्यूटी और बिल में भी मिलेगी रियायत।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। खिलौना निर्माण को बड़े उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने एक और कदम उठाया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। नीति के तहत खिलौना कारखानों तथा सहायक इकाइयों को लगाने के लिए खरीद अथवा पट्टे पर ली जाने वाली भूमि पर स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाएगी।

घरेलू पेटेंट कराने पर होने वाले व्यय का 75 प्रतिशत तथा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर 10 लाख एक मुश्त सब्सिडी दी जाएगी। दस वर्ष तक बिजली ड्यूटी में छूट मिलेगी। भू उपयोग परिवर्तन शुल्क माफ होगा। पांच वर्ष तक बिजली बिल में दो रुपये प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी दी जाएगी। यह अधिकतम 60 लाख रुपये प्रतिवर्ष होगी।प्रदेश में पहली बार खिलौनों नीति बनी है, जबकि खिलौना व सजावटी सामान के निर्यात में राज्य की बड़ी हिस्सेदारी है।

जीआई टैग वाली लाख की कारीगरी या लाख-निर्मित वस्तुएं और हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए वाराणसी, झांसी और चित्रकूट की दुनिया भर में पहचान है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों को रोजगार मिलता है। सरकार इसे संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नई नीति के तहत खिलौना क्लस्टरों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर बढ़ाने के साथ कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन के प्रभावी उपयोग तथा कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा।

प्रदेश में संचालित मौजूदा इकाइयों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रविधान किया गया है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्यांचल को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। नीति के क्रियान्वयन का प्रबंधन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग करेगा। पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 अथवा उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू होने वाली उत्तरवर्ती नीति के तहत प्रोत्साहन मिलेंगे।

नई नीति के तहत नोएडा, गाजियाबाद में उद्योग लगाने पर 20 प्रतिशत, मध्यांचल में 30 प्रतिशत, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में 40 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी दी जाएगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से आवंटित भूमि पर निवेशकों को सब्सिडी के बराबर बैंक गारंटी देनी होगी। बैंक गारंटी की अवधि कार्शियल उत्पादन शुरू होने के 4 वर्ष तक होगी। उत्पादन शुरू होने पर श्रेणीबद्ध तरीके से अनुदान भी दिया जाएगा।

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