यूपी में किसानों की कमाई का एक और मास्टर प्लान, योगी सरकार ने दिया पॉलिसी फाइनल करने का निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि वानिकी को बाजार और कृषि आधारित उद्योगों की मांग से जोड़ रही है।

HighLights
कृषि वानिकी को बाजार और उद्योगों की मांग से जोड़ा जाएगा।
किसानों को मांग वाली पौध प्रजातियों के लिए प्रशिक्षण मिलेगा।
ग्राफ्टिंग और टिश्यू कल्चर से गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार होगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। योगी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि वानिकी को सिर्फ पेड़ लगाने की योजना तक सीमित रखने के बजाय उसे बाजार और कृषि आधारित उद्योगों की मांग से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वन विभाग कृषि वानिकी नीति को अंतिम रूप देने जा रहा है। इसमें प्रदेश में स्थापित कृषि आधारित उद्योगों की जरूरत और बाजार की मांग के अनुरूप पौधों की प्रजातियां लगाने पर जोर दिया जाएगा।
किसानों को चिह्नित प्रजातियों के पौधे लगाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे किसानों के लिए फसलों के साथ पेड़-पौधों से अतिरिक्त और दीर्घकालिक आय का रास्ता तैयार हो सकेगा। सरकार की कोशिश कृषि वानिकी को किसानों की आय, उद्योगों की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण तीनों से जोड़ने की है।
उद्योगों के लिए कच्चे माल की बढ़ेगी उपलब्धता
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने निर्देश दिया कि कृषि वानिकी के लिए ऐसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए, जिनकी स्थानीय स्तर पर औद्योगिक मांग है। इससे किसानों को पौध लगाने के बाद उसके विपणन को लेकर अनिश्चितता कम होगी और लकड़ी, फल, औषधीय व अन्य कृषि आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी नीति को अंतिम रूप देने के साथ किसानों को संबंधित प्रजातियों के उत्पादन की तकनीक और बाजार की जरूरतों की जानकारी दी जाए। वन विभाग इस दिशा में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था करेगा, ताकि किसान मांग के अनुरूप पौध प्रजातियों का चयन कर सकें।
वन मंत्री ने पौधशालाओं में तैयार किए जा रहे पौधों की गुणवत्ता और वृद्धि बेहतर करने के लिए ग्राफ्टिंग और टिश्यू कल्चर तकनीक को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए हैं। प्रत्येक वन प्रभाग में संबंधित वन कर्मियों को इन तकनीकों का प्रशिक्षण दिलाना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसका उद्देश्य ऐसी गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराना है, जो तेजी से विकसित हों और किसानों तथा वन विभाग की जरूरतों के अनुरूप बेहतर उत्पादन दे सकें। गुणवत्तापूर्ण पौध की उपलब्धता को कृषि वानिकी के विस्तार की बुनियादी जरूरत माना जा रहा है।
कृषि वानिकी के विस्तार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि पौध प्रजातियों का चयन केवल पर्यावरणीय उपयोगिता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक उपयोगिता और बाजार मांग को ध्यान में रखकर किया जाए।
इससे किसानों को ऐसी प्रजातियां उगाने में मदद मिलेगी, जिनका आगे चलकर कृषि आधारित उद्योगों में इस्तेमाल हो सके। वन विभाग की पौधशालाओं को भी इसी जरूरत के अनुरूप तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
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