मखाना विकास योजना: मछली पालन के साथ मखाना खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, देवरिया में दिया गया प्रशिक्षण
देवरिया में मछली पालन के साथ मखाना खेती से किसानों की आय बढ़ाने के लिए 60 किसानों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
मखाना विकास योजना के तहत 60 किसानों को प्रशिक्षण।
मछली पालन के साथ मखाना खेती की तकनीक सिखाई गई।
देवरिया में पांच हेक्टेयर में मखाना उत्पादन का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, देवरिया। तालाबों और जलस्रोतों को आय के साधन से जोड़ने के लिए जिले में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। मखाना विकास योजना के तहत चयनित 60 किसानों का दो दिवसीय प्रशिक्षण सोमवार को कृषि ज्ञान केंद्र में शुरू हुआ। किसानों को मछली पालन के साथ मखाना, कमल व सिंघाड़ा जैसी जलीय फसलों की खेती की तकनीक बताई गई। जिले में पांच हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ भाजपा नेता संजय तिवारी, उप कृषि निदेशक सुभाष मौर्य तथा प्रगतिशील किसान वीरेंद्र मौर्य व तारकेश्वर शाही ने दीप प्रज्वलित कर किया।
जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने किसानों एवं वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तालाबों को जलीय फसलों से जोड़ने के साथ ही मत्स्य पालन के साथ मखाना उत्पादन का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद पात्र किसानों का चयन किया जाएगा।
मुख्य अतिथि ने किसानों से सहकारिता से जुड़कर सहफसली खेती के रूप में मखाना उत्पादन अपनाने का आह्वान किया। उप कृषि निदेशक ने फसल विविधीकरण को मृदा स्वास्थ्य और किसानों की आय के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सहायक निदेशक मत्स्य रमन चौधरी ने मछली पालन के साथ मखाना, कमल व सिंघाड़ा उत्पादन की तकनीक समझाई। कुशीनगर के प्रगतिशील मखाना किसान विवेक सिंह ने उत्पादन की प्रारंभिक तकनीक की जानकारी दी और किसानों को अपनी मखाना उत्पादन इकाई का भ्रमण करने का आमंत्रण दिया।
तकनीकी सत्र में बीआरडी पीजी कॉलेज के प्रोफेसर धीरज वर्मा ने पोषक तत्व प्रबंधन, विपणन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। कृषि ज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.प्रदीप कुमार और वैज्ञानिक डॉ. संतोष चतुर्वेदी ने भूमि चयन, बीज बोआई, रोग-कीट प्रबंधन सहित उन्नत उत्पादन तकनीक बताई।
प्रगतिशील किसानों तारकेश्वर शाही, वीरेंद्र मौर्य और मत्स्य उत्पादक संकर्षण शाही ने मखाना व अन्य जलीय फसलों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। अपर जिला कृषि अधिकारी अंबरीश मिश्रा व इफको प्रतिनिधि अभिषेक शुक्ला ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि किसानों को परंपरागत खेती में विविधीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पालीहाउस में शिमला मिर्च, खीरा व टमाटर जैसी फसलों से अधिक आय अर्जित की जा सकती है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 90 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ लेकर किसान पानी और लागत दोनों बचा सकते हैं।
योजना प्रभारी रणजीत यादव ने बताया कि प्रशिक्षण के अगले दिन किसानों को कुशीनगर के विभिन्न गांवों में मखाना उत्पादन इकाइयों का भ्रमण कराया जाएगा। इससे किसानों को ‘देखो और सीखो’ के माध्यम से उत्पादन की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी। संचालन वैज्ञानिक डॉ. संतोष चतुर्वेदी ने किया। इस दौरान उद्यान निरीक्षक पत्रिका सिंह, गिरिजा यादव, रवि गुप्ता, जितेंद्र प्रसाद, विनोद सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
