लखनऊ, जेएनएन। रायबरेली में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िताकी हालत में अभी सुधार नहीं है। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रामा सेंटर में पीड़िता के साथ भर्ती वकील को वेंटीलेटर से हटाया गया है।

लखनऊ के केजीएमयू ट्रामा सेंटर प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि युवती की कई हड्डियां टूटी हैं। इसके साथ ही उसके सीने में भी चोट है। उसकी हालत में मामूली सुधार हुआ है लेकिन अभी इसे संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। पीड़िता वेंटीलेटर पर है जबकि उसके वकील को वेंटीलेटर से हटा लिया गया है।

लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्नाव पीड़िता की हालत स्थिर बनी हुई है। पीड़िता के वकील की हालत में थोड़ा सुधार को देखते हुए उन पर से वेंटीलेटर को पूरी तरह से हटा लिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश के बाद इन दोनों का मुफ्त इलाज हो रहा है। फिलहाल पीड़ितावेंटीलेटर पर हैं।

घायल वकील महेंद्र सिंह को गुरुवार को भी दिन में कुछ देर के लिए वेंटीलेटर से हटाकर देखा गया था। इस दौरान उनकी तबियत स्थिर रही। इसके बाद में फिर उन्हें वेंटीलेटर पर कर दिया गया। डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता को वेंटिलेटर यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम से बाहर लाने की है। वह सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हुई है। केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में चौथे मंजिल के न्यूरो ट्रामा वार्ड में पीड़िता और उसके वकील आईसीयू में भर्ती हैं।

केजीएमयू में न्यूरो विभाग के डॉक्टर संदीप के मुताबिक, दोनों की हालत स्थिर है। सिर में डिफ्यूज ब्रेन इंजरी की वजह से पीड़िता कोमा में है, जो कि उनके खतरनाक हालात की ओर इशारा करता है। डिफ्यूज ब्रेन इंजरी कई बार सीटी स्कैन में भी पकड़ में नहीं आता, लेकिन कई मामलों देखा गया है कि स्वास्थ्य में सुधार के साथ पीड़ि कोमा से बाहर आ जाता है। डिफ्यूज ब्रेन इंजरी के अलावा पीड़िताको सबसे अधिक चोट उसके शरीर के दाहिने हिस्से में लगी है। गले के पास की दाहिनी हड्डी टूट गई है। दाहिना कॉलर बोन टूटा है। दाहिने छाती की हड्डी टूटी है। दाहिने हाथ की कोहनी टूटी हुई है. पेल्विस एरिया की सैकरम हड्डी टूटी हुई है। दाहिनी जांघ की हड्डी भी टूटी हुई है।

एक्सीडेंट के दौरान पीड़िता के शरीर से करीब डेढ़ लीटर खून का रिसाव हो चुका है। केजीएमयू में कई यूनिट खून पीड़िताको चढ़ाया जा चुका है। अब डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता को वेंटिलेटर यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम से बाहर लाने की है। रक्तचाप और पल्स सामान्य है, लेकिन जब तक कोमा से बाहर नहीं आते तब तक उन्हें बेहद गंभीर ही माना जाएगा। 

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