पैरामेडिकल डिग्रियों का बदला स्वरूप, अब पूरे देश में एक नाम और एक मानक; ड्यूरेशन और एडमिशन में भी होगी एकरूपता
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) ने 54 स्नातक व परास्नातक डिग्रियों को मानकीकृत किया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
54 स्नातक-परास्नातक डिग्रियां देशभर में मानकीकृत होंगी।
नाम, अवधि, प्रवेश योग्यता 2026-27 से एक समान।
फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी की अवधि 5 वर्ष।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के ढांचे के अनुरूप 54 स्नातक और परास्नातक डिग्रियों में एकरूपता का निर्णय लिया है। इनमें 33 नई और 21 पुनर्गठित डिग्रियां शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के नाम, अवधि और प्रवेश योग्यता देशभर में एक समान होगी। नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू हो जाएगी। अभी तक पाठ्यक्रमों के नाम और उनकी अवधि में काफी अंतर था।
31 अगस्त को जारी अधिसूचना में एक विषय के अलग-अलग नाम और पाठ्यक्रमों की अलग-अलग अवधि की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अभी तक रेडियोलाजी के क्षेत्र में कहीं बीआरआइटी (बैचलर आफ रेडिएशन टेक्नोलाजी), तो कहीं बीएससी रेडियोलाजी नाम से पाठ्यक्रम संचालित हो रहे थे। इनकी अवधि भी कहीं तीन वर्ष तो कहीं चार वर्ष थी। नई व्यवस्था में इन विसंगतियों को दूर करते हुए पाठ्यक्रमों के नाम और अवधि समान कर दी गई है।
कौन-कौन से पाठ्यक्रम हैं शामिल?
मानकीकरण के दायरे में रेडियोलाजी, नेत्र एवं दृष्टि विज्ञान, भौतिक चिकित्सा, व्यावसायिक चिकित्सा, चिकित्सा प्रयोगशाला विज्ञान, आपातकालीन चिकित्सा प्रौद्योगिकी, संज्ञाहरण एवं शल्य कक्ष प्रौद्योगिकी, पोषण, मनोविज्ञान, डायलिसिस और स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन समेत संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र के कई प्रमुख पाठ्यक्रम शामिल हैं।
नई व्यवस्था में फिजियोथेरेपी में स्नातक (बीपीटी), बैचलर आफ आक्यूपेशनल थेरेपी (बीओटी) और दृष्टि विज्ञान स्नातक (बीआप्टोम) जैसे प्रमुख पाठ्यक्रमों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। इससे विद्यार्थियों को व्यवस्थित और मानकीकृत प्रशिक्षण मिलेगा। स्नातकोत्तर स्तर पर विशेषज्ञता के विकल्प भी निर्धारित किए गए हैं। फिजियोथेरेपी में आठ, बीओटी में नौ तथा चिकित्सा रेडियोलाजी एवं प्रतिबिंबन में तीन विशेषज्ञताएं तय की गई हैं। इससे विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर शिक्षा के दौरान अपनी रुचि के अनुरूप विशेषज्ञता चुनने का विकल्प मिलेगा।
एनसीएएचपी अध्यक्ष डा. यग्ना उन्मेश शुक्ला के अनुसार, यह निर्णय एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम की दिशा में कदम है। डिग्री का नाम, अवधि और शैक्षणिक मानक देशभर में समान होने से विद्यार्थियों के बीच भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी। संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में पाठ्यक्रमों का मानकीकरण विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
एलाइड हेल्थकेयर कोर्सेज में दाखिले 30 सितंबर तक
उत्तर प्रदेश राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख परिषद (यूपीएसएएचपी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एलाइड और हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। निर्धारित तिथि के बाद प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। राज्य के विश्वविद्यालयों, कालेजों और संबंधित प्राधिकरणों को भी तय समयसीमा का पालन करना होगा।
यूपीएसएएचपी के अध्यक्ष डा. कमल पंत ने बताया कि केंद्रीय इकाई के निर्देशों के आधार पर शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू करने के लिए दाखिले की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।
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राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को एलाइड एवं हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी करना अनिवार्य है। प्रवेश की अंतिम तिथि से पहले संबंधित संस्थानों को काउंसिलिंग, दस्तावेज सत्यापन और शुल्क जमा करने समेत प्रवेश से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
