बलरामपुर, जेएनएन। क्षेत्र के तुलसीपुर मार्ग स्थित बेलवा गांव के पास ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आने से बाइक सवार जनकपुर निवासी माता प्रसाद व उसके पड़ोसी सुरेश कुमार की मौत हो गई। पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्राली को थाने में लाकर सीज कर दिया है। मृतक के भाई जग प्रसाद की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।बताया जाता है कि माता प्रसाद अपनी बड़ी बेटी चांदनी की शादी के लिए नई बाइक खरीदकर लाया था। गुरुवार को वह बाइक की पहली सर्विसिंग कराने के लिए तुलसीपुर गया था। उसे बाइक चलाना नहीं आता था, इसलिए पड़ोसी सुरेश कुमार को साथ लेकर गया था।

वापस लौटते समय बेलवा गांव के पास अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राली ने बाइक को ठोकर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिर गए। घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। मौत की खबर सुनते ही गांव में कोहराम मच गया। जो जिस हाल में था, घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़ा। पुलिस ने घटनास्थल पर जमा भीड़ को हटाकर ट्रैक्टर-ट्राली को अपने कब्जे में ले लिया। प्रभारी थानाध्यक्ष कलाधर दुबे ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्राली को थाने लाकर सीज कर दिया गया है। मृतक के भाई की तहरीर पर मुकदमा लिखकर मामले की छानबीन की जा रही है।

बाबुल का छूटा साथ...कैसे पीले होंगे चांदनी के हाथ : एक माह बाद बड़ी बेटी चांदनी की शादी का अरमान लिए माता प्रसाद तैयारियों में जुटा था। दामाद को भेंट देने के लिए खरीदी बाइक की पहली सर्विसिंग कराकर घर लौट रहा था। उसे क्या मालूम था कि रास्ते में काल उसके अरमानों को रौंदने का इंतजार कर रहा है। बेलवा गांव के पास ट्रैक्टर-ट्राली की ठोकर से हंसते-खेलते परिवार की खुशियां तबाह हो गईं। बेटी की डोली उठने का ख्वाब लिए माता प्रसाद ने हमेशा के लिए आंख मूंद ली। जिस घर में एक माह बाद शहनाई बजनी थी, वहां परिवारजन के करुण क्रंदन से कोहराम मचा हुआ है। सारथी बनकर गया सुरेश उर्फ कल्लू भी दुर्घटना की भेंट चढ़ गया। दुर्घटना से पूरा गांव शोकाकुल है। ग्रामीण पीड़ित परिवारों को ढांढ़स बंधाने में जुटे हैं।

जनकपुर निवासी माता प्रसाद के चार बेटे व तीन बेटियां हैं। उसकी बड़ी बेटी चांदनी की शादी नौ मई को तुलसीपुर के मोतीपुर गांव निवासी रामबरन के पुत्र संजीव से होनी है। 25 अप्रैल को तिलकोत्सव होना है। परिवार के लोग शादी की तैयारियाें में जुटे थे। चांदनी अपने हाथों में मेहंदी रचाने के ख्वाब बुन रही थी। बाबुल का साया सिर से उठने की खबर लगते ही उस पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। सुहागन बनने की खुशी काफूर होते ही खुद को अभागन बताकर फूट-फूटकर रोती है। पत्नी अनीता उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह अपना माथा पीटते हुए भाग्य को कोस रही है। वह कहती है कि अब बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे। जिम्मेदारियों के मझधार में अकेला छोड़कर क्यों चले गए।

चांदनी की बरात का स्वागत करेंगे ग्रामीण : दु:ख की इस घड़ी में चांदनी की डोली विदा करने का बीड़ा ग्रामीणों ने उठा लिया है। गांव के जगराम व अनुज यादव ने कहाकि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर वर पक्ष के लोगों को एतराज नहीं होगा, तो चांदनी की शादी पूरे धूमधाम से कराई जाएगी। बरातियों के स्वागत व रस्म-रिवाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।