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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लखनऊ में छत ढहने से दो मासूम बच्चों की मौत-मां की हालत गंभीर, हो रहा था पीएम आवास का न‍िर्माण

By Anurag GuptaEdited By:
Published: Mon, 15 Nov 2021 11:41 PM (IST)Updated: Tue, 16 Nov 2021 07:13 AM (IST)

सोमवार तड़के सुनील बड़े बेटे आदित्य और मां भगाना के साथ घर के बाहरी हिस्से में सो रहा था जबकि ...और पढ़ें

मलिहाबाद के लालूहार जि‍ंदौर गांव में हुआ हादसा। घटनास्थल पर अधिकारियों ने पहुंचकर दिया मदद का आश्वासन।
मलिहाबाद के लालूहार जि‍ंदौर गांव में हुआ हादसा। घटनास्थल पर अधिकारियों ने पहुंचकर दिया मदद का आश्वासन।

लखनऊ, जागरण टीम। मलिहाबाद के लालूहार जि‍ंदौर गांव में सोमवार तड़के मजदूर सुनील के कच्चे मकान के एक हिस्से की छत ढह गई। मलबे में उसकी पत्नी सुधा, सात साल का बेटा कार्तिक और चार वर्षीय बेटी मीशू दब गई। हादसे में मीशू और कार्तिक की मौत हो गई और सुधा गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी पर केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर, हनुमान प्रसाद एसडीएम मलिहाबाद और अन्य अफसर पहुंचे। उन्होंने परिवार को मदद का आश्वासन दिया।

सोमवार तड़के सुनील, बड़े बेटे आदित्य और मां भगाना के साथ घर के बाहरी हिस्से में सो रहा था, जबकि पत्नी सुधा, कार्तिक और नीशू के साथ अंदर कोठरी में सो रही थी। इस बीच कोठरी की छत भरभरा कर गिर गई। चीख-पुकार सुनकर सुनील उसकी मां और बेटे की नींद खुली और वह भागकर बरामदे से बाहर पहुंचे। सुनील ने पीछे कोठरी गिरी देखी तो वह चीखने लगा। सुनील ने ग्रामीणों की मदद से आननफानन मलबा हटाना शुरू किया। इस बीच सूचना पर इंस्पेक्टर नित्यानंद भी फोर्स के साथ पहुंचे। लोगों ने मलबे में दबे दोनों बच्चों और सुधा को निकाला और सीएचसी लेकर गए पहुंचे जहां, बच्चों को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और सुधा की हालत नाजुक देख उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुनील के दो मासूम बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया।

हाल ही में मिला था प्रधानमंत्री आवास : इंस्पेक्टर नित्यानंद ने बताया कि सुनील की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन्हें हाल ही में प्रधानमंत्री आवास मिला था। घर के आगे के हिस्से में वह घर बनवा रहे थे। उसमें भी शटरि‍ंग लगी थी। पिछला हिस्सा कोठरी वाला अभी कच्चा ही था, जिसकी छत सोमवार तड़के ढह गई।

खिलौने से पहले सज गई अर्थी : एक साथ दो बच्चों की मौत का सदमा सुनील बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। वह फूट-फूटकर रोने लगा। लोगों ने उसे ढांढस बंधाते हुए शांत कराया। सुनील ने बताया कि वह बहुत गरीब है। उसका बेटा जब पड़ोसियों के पक्के मकान देखता तो घर पर आकर कहता था कि पापा हमारा मकान कब बनेगा। इस पर उसे दिलासा देकर शांत करा देता कि बेटा जल्दी ही बनवाएंगे। बेटा कहता था कि पक्का घर बनने के बाद अलमारी में हम भी खिलौने सजाएंगे। सुनील ने बताया कि हाल में ही जब उसे प्रधानमंत्री आवास आवंटित हुआ तो कार्तिक समेत पूरा परिवार खुश था। शटरि‍ंग लगी तो बेटा पूछता कि पापा अब कितने दिन में मकान तैयार हो जाएगा। सुनील ने बताया कि दीपावली पर दुकान से ग्वालिन, शेर, भालू और तोता खरीदा था। खिलौनों से पहले बेटे और बेटी की अर्थी सज गई।

मां को नहीं दी बच्चों की मौत की जानकारी : निजी अस्पताल में भर्ती सुधा की हालत नाजुक बताई जा रही है। देर रात तक उसको बच्चों की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। सुनील ने बताया कि सुधा कार्तिक और बेटी मीशू को बहुत प्यार करती थी। वह उनकी मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी, इसलिए उसे अभी यह जानकारी नहीं दी।