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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Note ban: घुड़चढ़ी और हल्दी रस्म छोड़ करेंसी बदलने पहुंचे दूल्हे

By Nawal MishraEdited By:
Published: Thu, 10 Nov 2016 06:51 PM (IST)Updated: Fri, 11 Nov 2016 10:57 PM (IST)

एटा जिले में हल्दी में रंगा दूल्हा बैंक के बाहर कतार में खड़ा था। वह पूरे परिवार को साथ लाया। ...और पढ़ें

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लखनऊ (जेएनएन)। घर के आंगन में मंडप गड़ा था और मंगल गीत बज रहे थे। दूसरी ओर, हल्दी में रंगा दूल्हा बैंक के बाहर कतार में खड़ा था। वह अकेला नहीं, इस शख्स के पूरे परिवार को कतार में लगना पड़ा तब कहीं बरात ले जाने भर के पैसों का इंतजाम हो पाया। इसी तरह मेरठ का एक दूल्हा घुड़चढ़ी छोड़कर पहले करेंसी बदलने बैंक पहुंच गया।

परिवार समेत बैंक पहुंचा दूल्हा

एटा जिले के नगला मगधनी निवासी रघुवर दयाल की शादी 11 नवंबर को है। पहले से ही धन जुटा लिया गया था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि बरात से ठीक पहले नोट बंदी का बम फूट पड़ेगा। घर में रुपये तो हैं, मगर चलन से बाहर होने से बड़ी समस्या बन गए हैं। बुधवार को बैंक बंद रहने से परिजन चाहकर भी कुछ इंतजाम नहीं कर सके। जिप परिचितों से आर्थिक सहयोग मांगा, उनके पास भी बड़े ही नोट थे। गुरुवार को बैंक खुलते ही परिजन बड़े नोट लेकर बदलवाने पहुंच गए। बैंक कर्मियों ने के बताने पर कि एक व्यक्ति को अधिकतम चार हजार रुपये के नोट ही बदलकर दिए जाएंगे। मजबूरन दूल्हे समेत परिवार के सभी लोगों को बैंक पर बुला लिया गया। गुरुवार को रघुवर दयाल की हल्दी की रस्म हुई थी। वे भी हल्दी में रंगे सिविल लाइन स्थित बैंक शाखा पहुंचकर नोट बदलवाने के लिए फॉर्म और आइडी पकड़े लाइन में खड़े रहे।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और काला धन से निपटने के लिए सरकार का यह निर्णय बेशक बहुत अच्छा है, लेकिन इसका समय बहुत गलत चुना गया है। जिनके यहां शादी है, ऐसे बहुत से परिवारों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। देखिये मैं खुद, परिवार के दस लोगों के साथ लाइन में लगा हूं।

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घुड़चढ़ी छोड़ करेंसी बदलने पहुंचा दूल्हा

नोट बदलने की मारामारी के बीच आज एक दूल्हा शादी की रस्म घुड़चढ़ी छोड़कर पैसे लेने बैंक पहुंच गया। मेरठ के बहादरपुर निवासी सुमित पुत्र वेद प्रकाश वाल्मीकि का गुरुवार को मंढा था। शुक्रवार को उसकी बरात मंढियाई जानी थी। चेहरे पर हल्दी लगी होने के बावजूद सुमित सुबह साढ़े आठ बजे बैंक शाखा पहुंच गया। बैंक खुलने पर पता चला कि पैसे नहीं है, दोपहर तक आएंगे। सुमित ने बताया कि 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने से विवाह कार्यक्रम के आयोजन में काफी दिक्कतें आ रहीं थीं, जिसके चलते खुद बैंक आना पड़ा।

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