लखनऊ, [नीरज मिश्र]। चालक को अगर नींद आने लगी तो अलर्ट आएगा। सामने गाड़ी है तो संकेत मिलने लगेंगे। ओवरटेक करने के दौरान अगर पर्याप्त जगह नहीं है तो हादसे से पहले ही बस रुक जाएगी। मार्ग पर गाड़ी (मेटॉलिक ऑब्जेक्ट) खड़ी है तो चेताने के साथ ही समय से पहले उसमें ब्रेक लग जाएगा। तय सीमा से बस की गति अधिक है तो भी वह नियंत्रित हो जाएगी। दुर्घटना रोकने के लिए इस तरह की तमाम असावधानियों पर कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक डिवाइस नजर रखेगी। न केवल निगरानी आवश्यकता पड़ने पर इसमें लगे सेंसर बस रोक देंगे।

मानवीय चूक से होने वाली जनहानि बचाने के लिए परिवहन निगम का लखनऊ क्षेत्र अपनी दो बसों में एंटी कोलेजन डिवाइस(फ्रंट कोलीजन एवायडेंस सिस्टम) लगाने जा रहा है। ट्रायल के तौर पर तेज रफ्तार एसी जनरथ बस में इसका प्रयोग करेगा।

इस तरह कार्य करेगी डिवाइस

डिवाइस में दो तरफ सेंसर लगे होंगे। एक सामने और अगल-बगल के क्षेत्र को कवर करेगा तो दूसरा चालक के सामने होगा। पहला सेंसर आगे जा रहे या सामने से आ रहे वाहन की गति नापता रहेगा। जैसे ही गाड़ी की स्पीड दुर्घटना जोन के दायरे में आने वाली होगी सेंसर आगाह करेगा। पीली लाइट जलेगी। चंद पलों में ही यह रेड लाइट अंतिम सिग्नल के रूप में आएगी और उसके बाद गाड़ी दुर्घटना जोन में पहुंचने से पहले ही रुक जाएगी। ओवरटेक करने के वक्त पर्याप्त दूरी न होने या फिर आगे वाहन होने पर गाड़ी तब तक नहीं बढ़ेगी जब तक रास्ता और दूरी का अंतराल सुरक्षित नहीं हो जाता है।

दूसरा, सेंसर ड्राइवर की मूवमेंट पर रखेगा नजर

बस चालक के सामने दूसरा सेंसर लगा होगा। ड्राइवर को अगर नींद आ गई या फिर एक पोजीशन में लगातार बैठा रहा तो सेंसर उसे सोने की अवस्था में मानेगा। बस चलाते वक्त ड्राइवर के हाथ का मूवमेंट स्टेयरिंग और पोजीशन पर दिखना चाहिए। चालक एक हालत में बैठा दिखा तो आगाह कर बस में ब्रेक लगा देगा।

क्या कहते हैं क्षेत्रीय प्रबंधक ?

क्षेत्रीय प्रबंधक पल्लव बोस का कहना है कि लखनऊ रीजन में इस पूरे वर्ष में निगम की 42 बसें हादसों का शिकार हुईं। इनमें 14 रोडवेज चालकों की मौत हुई और कई यात्री चोटिल हुए हैं। इसे देखते हुए दो एंटी कोलीजन डिवाइस के आर्डर किए गए हैं। इसका ट्रायल इसी माह जनरथ सेवा में किया जाएगा।

Posted By: Anurag Gupta