लखनऊ, (जेएनएन)। ऑस्टियो आर्थराइटिस से बचना है तो आप नियमित व्यायाम करें और धूप में जरूर बैठें। तभी आप इस बीमारी से बच पाएंगे। यह विचार केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने व्यक्त किए।गठिया रोग विभाग द्वारा ऑस्टियो आर्थराइटिस के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए वॉकाथान का आयोजन किया गया। केजीएमयू के कलाम सेंटर से लेकर पैथोलॉजी तक डॉक्टर व विद्यार्थी एक साथ दौड़े।

कार्यक्रम में गठिया रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ दास ने बताया कि ऑस्टियो आर्थराइटिस, हृदय रोग व मधुमेह आमतौर पर साथ-साथ होती है। यह रोग भी घुटनों में होने वाली गठिया की तरह ही होता है। मगर ऑस्टियो आर्थराइटिस से मृत्यु दर अन्य आर्थराइटिस की तुलना में 1.7 गुना अधिक है। नियमित व्यायाम, टहलने और धूप में बैठने के साथ-साथ वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसका कोई इलाज नहीं है, ऐसे में इसके बचाव का उपाय ही श्रेष्ठ है।

क्या होती है ऑस्टियो आर्थराइटिस

ऑस्टियो आर्थराइटिस एक तरह की आर्थराइटिस ही है। जिसमें हड्डियों के टिशू में लचीलापन कम हो जाता है। इस रोग में हड्डियों के जोड़ों की कार्टिलेज घिस जाते हैं और उसमें चिकनाहट कम हो जाती है। आमतौर पर यह बीमारी 40 से 50 वर्ष के व्यक्ति में होती है, मगर शहरी क्षेत्रों में युवाओं में यह रोग तेजी से हो रहा है।

Posted By: Anurag Gupta

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