लखनऊ [नीरज मिश्र]। 10 से 15 दिन में आवेदकों के पते पर डीएल पहुंचाने के दावे हवा में हैं। रोज नए पेच फंसने से आवेदक परेशान हैं। पर, विभागीय जिम्मेदारों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है।

परिवहन आयुक्त कार्यालय से शुरू की गई डीएल प्रिंटिंग की व्यवस्था अब लोगों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। अभी तक 17 हजार पुराने लाइसेंस आवेदकों तक पहुंचे नहीं, उस पर केएमएस (की-मैनेजमेंट सिस्टम) का पेच फंस गया। केएमएस समय से न हो पाने के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों के हजारों लाइसेंस फंसे पड़े हैं। बैक लॉग भी बढ़ता जा रहा है। नतीजा, परिवहन आयुक्त कार्यालय डीएल का डं¨पग ग्राउंड बनता जा रहा है।

30 सेकेंड की प्रक्रिया में 15 दिन : केएमएस से डीएल कार्ड में आए डाटा और सिम के डाटा की मिलान कर उसकी फीडिंग की जाती है। ओके होते ही महज 20-30 सेकेंड के भीतर कार्ड पर चिप और डाटा की लॉकिंग की जाती है। उसके बाद डाटा सुरक्षित और गोपनीय हो जाता है। फिर उसे कोई नहीं देख सकता। सिर्फ मशीन ही उसे पढ़ सकती है। सवाल उठता है कि जो प्रक्रिया पहले महज 20-30 सेकेंड में पूरी हो जाती थी अब उसे पूरा करने में एक पखवारा क्यों लग रहा है?

यह है डीएल लेने की प्रक्रिया : सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। फिर डेट और स्लॉट बुकिंग। बायोमेटिक, स्क्रूटनी, फोटो, टेस्ट के बाद अधिकतम 24 घंटे के अंदर आरटीओ से अप्रूवल। फिर डीएल प्रिंटिंग के लिए परिवहन आयुक्त कार्यालय भेजा जाता है। कार्ड प्रिंट होने के बाद केएमएस के माध्यम से परिवहन अधिकारी डाटा मिलान कर कार्ड पर चिप की लॉकिंग करते हैं। फिर डीएल को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ते हुए डिस्पैच कर पोस्टल सर्विस से आवेदक के घर भेजा जाता है।

Posted By: Anurag Gupta

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