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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इस बार रक्षाबंधन महज तीन घंटे 22 मिनट का

By Ashish MishraEdited By:
Published: Wed, 02 Aug 2017 03:12 PM (IST)Updated: Thu, 03 Aug 2017 12:36 PM (IST)

भाइयों की कलाई सजाने के लिए बहनों के पास सिर्फ तीन घंटे 22 मिनट ही होंगे। वह नेह का धागा ...और पढ़ें

इस बार रक्षाबंधन महज तीन घंटे 22 मिनट का
इस बार रक्षाबंधन महज तीन घंटे 22 मिनट का

वाराणसी (जेएनएन)। सनातन धर्मियों के प्रमुख चार पर्वों में रक्षाबंधन का विशिष्ट स्थान है। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। ऐसे में इसे श्रावणी या रक्षाबंधन भी कहते हैं। पर्व इस बार सात अगस्त को मनाया जाएगा लेकिन भाइयों की कलाई सजाने के लिए बहनों के पास सिर्फ तीन घंटे 22 मिनट ही होंगे। वह नेह का धागा सुबह 10.31 बजे से दोपहर 1.52 बजे तक ही बांध पाएंगी।


इसके पीछे कारण यह कि इस बार श्रावण पूर्णिमा पर रात 10.53 बजे श्रवण नक्षत्र-मकर राशि पर खंड चंद्रग्रहण लग रहा है जो मध्यरात्रि 12.48 बजे तक बना रहेगा। धर्मशास्त्रीय विधान के अनुसार चंद्रग्रहण में ग्रहण से नौ घंटे पूर्व व सूर्यग्रहण में 12 घंटे पहले तक सूतक होता है। ऐसे में सात अगस्त को दोपहर 1.53 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल आरंभ हो जाएगा।
इसके अलावा धर्म शास्त्रीय विधान के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि में भद्रा के उपरांत ही रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है और भद्रा सात अगस्त को दिन में 10.30 बजे तक है। ऐसे में भद्रा व चंद्रग्रहण के सूतक से मुक्त अवधि सिर्फ सुबह 10.31 बजे से दोपहर 1.52 बजे तक ही मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार भद्रा में रक्षा पर्व और फाल्गुनी दोनो ही वर्जित हैं क्योंकि भद्रा में श्रावणी मनाने से राजा का और फाल्गुनी पर प्रजा का अनिष्ट होता है। वहीं ग्रहण के सूतक काल में सिर्फ भगवद् आराधना ही की जाती है। इस बार श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन सात अगस्त को पड़ रहा है। पूर्णिमा तिथि छह अगस्त की रात 9.56 बजे लग रही है जो सात अगस्त को रात 11.02 बजे तक रहेगी।

कथा रक्षा पर्व की
वैदिक काल में एक बार देव-दानवों में युद्ध हुआ। इसमें 12 वर्षों तक देवता बार-बार हारते चले गए। इसपर देव मंत्री बृहस्पति की अनुमति से युद्ध रोक दिया गया। उनके ही आदेश पर इंद्राणियों ने इंद्र का रक्षाबंधन किया। उसके प्रभाव से देवराज इंद्र राक्षसों का संहार करने में सफल हुए और विजय प्राप्त हुई। वह तिथि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा थी। तभी से सनातनधर्मियों में रक्षाबंधन पर्व मनाने के परंपरा चली आ रही है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को और ब्राह्मïण अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर पूरे एक वर्ष तक के लिए सुरक्षित करते हैं।