लखनऊ, (विनय तिवारी)। आठ साल की उम्र में पाच वर्ष की बच्ची की जान बचाने में अपने दोनों हाथ और एक पैर खो चुके बहादुर मोहम्मद रियाज की यह पीड़ा है। अपनी वीरता के लिए 2003 में पूर्व राष्ट्रपति, पीएम और सीएम से सम्मानित मो. रियाज फुटपाथ किनारे ठेले पर चाय व पान मसाला बेचने को मजबूर है। फटे पुराने कपड़ों में वृंदावन कॉलोनी सेक्टर छह स्थित अपने मकान से कुछ दूरी पर फुटपाथ पर यह जद्दोजहद इस वीर की दिनचर्या है।

पिता मो. अहमद मानसिक बीमारी के कारण घर पर ही रहते हैं। मां किशमतुन निशा चौका बर्तन करती हैं। परिवार में तीन छोटी बहन इकरा, अजरा व रूबी व एक भाई अमन है। मो. रियाज का कहना है कि परिवार का पेट पालने के लिए काम करना पड़ता है। उसका दर्द यह है कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सहित हर बड़े नेता ने कहा था कि तुम्हारी बहादुरी के चलते तुम्हें इंटर पास करने के बाद नौकरी दी जाएगी। बावजूद इसके 2017 में इंटर में 89 फीसद नंबर लाकर भी वो आज भी नौकरी के लिए नेताओं के चक्कर लगा रहा है।

रियाज ने कहा कि यह कितना सही है कि कोई भी हादसे में खत्म हो जाता है। लोग प्रदर्शन करते हैं और सरकार दबाव में आकर उन्हें नौकरी दे देती है। मैं तो किसी और की जान बचाने के लिए अपाहिज हो गया। फिर मुझे नौकरी क्यों नहीं दी गई? क्या सम्मान देने के बाद सब भूल जाते हैं जैसे मेरे साथ हो रहा है..।

मिल चुके कई सम्मान

इस बहादुरी के लिए मो. रियाज को 26 जनवरी के दिन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सहित अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कई बड़े नेताओं ने सम्मानित किया। संजय चोपड़ा अवार्ड, ग्लोबल बेबी सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

ये हुई थी घटना

दिसंबर, 2003 की घटना है। आठ वर्षीय मोहम्मद रियाज बुद्धा पार्क में झूला झूल रहे थे। उसे एक पांच वर्ष की बच्ची सादिया रेलवे पटरी पर जाती दिखी। उसने आवाज लगाई पर वो नहीं सुनी। यह देख रियाज झूले से उतर कर पटरी की ओर भागा। जैसे ही रियाज ने बच्ची को पकड़ा तभी रेलवे पटरी की कैची में उसका पैर फंस गया। इस बीच ट्रेन आ गई। यह देख रियाज ने बच्ची को दूसरी ओर ढकेल दिया। इस घटना में रियाज का एक पैर व दोनों हाथ कट गए थे।

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